EMOTIONAL INTELLIGENCE 2.0 By Travis Bradberry & Jean Greaves In hindi

इमोशनल इंटेलिजेंस क्या है ? What’s Emotional Intelligence ?

EMOTIONAL INTELLIGENCE 2.0 By Travis Bradberry & Jean Greaves In hindi

Emotional Intelligence

बहुत पहले , लोगो की सोच थी कि सक्सेस के लिए अकेले high IQ लेवल का होना ही काफी है . अगर आप बेहद स्मार्ट हैं तो कम्पनियाँ आपको ज़रूर जॉब पर रख लेंगी . हालांकि , बहुत सारे स्टडी के रिजल्ट कंफ्यूसिंग निकले . ये बात जाहिर हुई कि high IQ वाले लोगो ने average IQ वालो से सिर्फ 20 % बार ही ज़्यादा बेहतर परफॉर्म किया था . रिसर्च करने वाले इस बात पर बहुत हैरान हुए कि average IQ वाले लोगों ने high IQ वालो को 70 % बार मात दी थी . बहुत सालों के रिसर्च के बाद ये बात पता चली कि किसी भी इंसान के success में Emotional intelligence ( EQ ) का बहुत बड़ा हाथ होता है . Emotional intelligence , का मतलब है खुद की और दूसरों की भावनाओं को पहचानने और स्वीकारने की काबिलियत . EQ , इस awareness का इस्तेमाल करके , आपके रिलेशनशिप और बिहैवियर को इम्प्रूव करने में मदद करता है . अब जबकि आपको पता चल चुका है कि Emotional intelligence भी कोई चीज़ होती है , अब आप सोचेंगे कि इसकी ज़रूरत ही क्यों है ? अगर आप जॉब करना चाहते हैं , तो आपको अपने EQ पर काम करने की ज़रूरत पड़ेगी और , जब आपके रिलेशनशिप को संभालने की बात आती है तो उसमे भी EQ ज़रूरी है . कुछ ऑथर्स की स्टडी में पाया गया कि emotional intelligence बहुत सारे इम्पोर्टेन्ट स्किल्स का ” फाउंडेशन ” है . आप EQ को एक पेड़ मान सकते है जिसमें उसके पत्ते है – communication , empathy , time management वगैरह . EQ इतना ज़रूरी है क्योंकि जब किसी आदमी के जॉब परफॉरमेंस की बात आती है तो 58 % बार success इसके कारण ही मिलती है . आपका emotional intelligence आपको बना भी सकता है और बिगाड़ भी सकता है . आप अगर successful और संतुष्ट होना चाहते है , तो सबसे पहले आपको अपने emotional intelligence Skills पर काम करना होगा . आगे के chapters में हम EQ के चार dimensions के बारे में डिसकस करेंगे|

द इमोशनल इंटेलिजेंस का पहला डायमेंशन : सेल्फ – अवेयरनेस

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The First Dimension of Emotional Intelligence : Self – Awareness .

जब आप self -aware होते हैं , तो आप यह समझ पाते हैं कि आप हर सिचुएशन में क्या महसूस कर रहे हैं . अपने इमोशंस के बारे में सोचते हुए टाइम बिताने को ही self -awareness पर काम करना कहते है . आपको किस बात पर गुस्सा आता है ? आपको क्या चीज़ ख़ुशी देती है ? आपको ये समझने की ज़रूरत है कि क्यों कुछ बातें हमें रिएक्ट करने पर मजबूर करती हैं . अगर आप खुद को समझने के लिए कुछ टाइम निकालेंगे तो आप सरप्राइज होंगे कि आप कितना कुछ जान सकते है . आप एक केस इमेजिन कीजिये , मान लीजिये ऑफिस में आपका दिन बहुत ही खराब था क्योकि आपके बॉस ने आपको एक डेडलाइन मिस करने का दोषी ठहराया था . आप अपने गुस्से को काबू करने कि कोशिश करते है . अपने बॉस पर चिल्लाना चाहते है क्योकि वो आपकी गलती नहीं थी , आपके साथ काम करने वाली की गलती थी . इससे पहले कि आप कुछ कह पाते , बॉस ने आपको निकाल दिया और , जब तक आप अपने घर पहुंचते है तब तक आपका मुँह गुस्से से लाल हो चुका है . फिर , आप अपने बच्चे को कीचड़ में खेलते हुए देखते है . उस पर चिल्लाते हैं और कहते हैं कि वो खुद को ही गन्दा कर रहा है|.

बच्चा रोता है क्योंकि वो आपके गुस्से को देखकर डरा हुआ है . एक आम दिन में आपको इस बात पर बिलकुल गुस्सा नहीं आता . जैसे ही आपको इस बात का एहसास होता है , आप गिलटी महसूस करने लगते है कि जब भी आपके ऑफिस में कोई बात बिगड़ती है , आप अपने बच्चे पर गुस्सा निकाल देते हैं . अगर आपको इस सिचुएशन में self – awareness की प्रैक्टिस करनी है तो ये चेक करना होगा कि आप जो कर रहे वो सही है या नहीं . आपको ये पता है कि आपके बच्चे की इसमें कोई गलती नहीं थी . आप self -aware होकर ही समझेंगे कि आपको इस सिचुएशन में सही में क्या करना चाहिए . अगर आपके पास self – awareness है , तो आप खुद पर हैल्थी तरीके से काम कर पाएंगे . आप अपने इमोशंस को समझने से डरेंगे नहीं , और आपको पता होगा कि ज़रूरत पड़ने पर इनसे कैसे डील कर सकते है . Emotions को आप जहां तक रोक सकते है , वहां तक वो रुके रहते है . अगर आपको हमेशा डर लगा रहता है पर आप इसका कारण नहीं जानते तो इस तरीके से तो आप बहुत सारे opportunities खो देंगे . ऐसा ही कुछ होता है जब गुस्सा आप पर हावी हो जाता है . अगर आपको आपकी फीलिंग्स के बुरे हिस्सों के बारे में पता होगा तभी तो आप उसके बारे में कुछ कर पाएंगे और आप अपना फुल पोटेंशियल पा सकेंगे . इस बुक के ऑथर्स ने दूसरे रिसर्च करने वालो के साथ मिलकर एक Emotional Intelligence Appraisal Test बनाया . आपको अपने EQ को बेहतर जानने में मदद करता है और उन areas पर स्कोर देता है , जिनमें आप अच्छे हैं और उनमें भी जिनमे आपको काम करने की ज़रूरत है . डेव , एक रीजनल सर्विस मैनेजर है और Emotional Intelligence Appraisal Test में उनका स्कोर 95 आया|

इसका मतलब है कि वो अपने EQ के टच में है . लेकिन शुरू – शुरू में , डेव के स्कोर इतने ज़्यादा नहीं थे पर स्कोर को बढ़ाने के लिए जो भी ज़रूरी स्टेप्स लेना पड़ा , डेव ने लिया और उन्हें उसका फायदा भी मिला . जैसे – जैसे डेव ने इम्प्रूवमेंट दिखाई वैसे – वैसे उनके ऑफिस में काम करने वालो ने उनमें फ़र्क देखा . उनके साथ काम करने वालों ने कहा कि डेव पहले से ज़्यादा determined और hardworking हो गए है . जब भी डेव कि टीम में कोई बड़ी गड़बड़ी होती तो डेव को गुस्सा आ जाता , फिर वे इसका solution निकालने में लग जाते . टीना एक मार्केटिंग मैनेजर है और इनका Self – awareness score 69 है . उनके साथ काम करने वाले लोगो ने ये देखा कि टीना प्रेशर में बिलकुल काम नहीं कर सकती थी और बहुत परेशान हो जाती थी . टीना अपने इमोशंस को खुद पर हावी होने देती थी और अपने चिडचिडाहट को दूसरों पर निकालती थी . उनके लिए बेहतर होता अगर वो अपनी आदतों को बेहतर जानती और उस पर काम करती!

सेल्फ- अवेयरनेस स्ट्रेटेजीज Self – Awareness Strategies

ये बताना मुश्किल है कि जिस स्टेज में आप हैं वहाँ आपमें self -awareness है या नहीं . ये लाइन दिखाई नहीं देती . Self -awareness का सफर तो ज़िन्दगी भर का है . ये खुद के अंदर झांककर खुद पहचानने के बारे में है . जब आप अपने इमोशंस के टच में नहीं होते , तो ये सारे इमोशंस अजीब तरीके से बाहर निकलते है . कई बार तो आपको ये हैरान भी कर देते है क्योंकि कभी – कभी ये अचानक यूँ ही बिना बताये निकल जाते है . आप हैरान हो जाते हैं जब एक छोटी सी ” ना ” भी आपको कई दिन तक परेशान कर देती है या जब कोई ज़रा सी भी गड़बड़ी कर देता है तो भी आपको बहुत ज़्यादा गुस्सा आता है . यानी कि , आपकी फीलिंग्स आपके किसी सिचुएशन से मेल नहीं खाती . इससे ये पता चलता है कि आपको इस बारे में कुछ करना ही होगा . जब भी self -awareness की बात आती है , आपको खुद के साथ ईमानदार होना होगा . जब आप खुद की ऐसी चीज़ों बारे में ध्यान देना शुरू करते हैं जिनके बारे में आपको पहले पता नहीं था , तो समझ लीजिये कि आप सही रास्ते पर हैं . जैसे कि , हो सकता है आपको ये महसूस हो कि आप अपना गुस्सा किसी दूसरे पर निकाल रहे हैं . दूसरे सिचुएशन में हो सकता है कि आपको ये एहसास हो कि आप चीज़ो को ज़रूरत से ज़्यादा बड़ा कर देते हैं|

Self -aware होने में आपकी हेल्प के लिए ऑथर्स ने एक स्ट्रेटेजी के बारे में बताया है . ये स्ट्रेटेजी है – ‘ Observe the Ripple Effect ” . पानी में गिरते एक पत्थर कि तरह ही आपके इमोशंस दूसरे लोगों में लहरें यानी रिप्पल पैदा करती है . एक मैनेजर , जो अपने एक एम्प्लोयी पर बाकी सभी एम्प्लाइज के सामने चिल्लाता है और उसका अपमान करता है तो एक रिप्पल पैदा होता है।

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ऐसा लगता है कि जिस एम्प्लोयी का इंसल्ट हुआ था सिर्फ वो एफेक्ट हुआ है , पर ऐसा नहीं है . वो सारे एम्प्लोयी जो वहाँ मौजूद थे उन्हें भी ऐसा लगा जैसे उनको भी डाँट पड़ी है . सारा दिन सब ये सोचते हुए गुजारते हैं कि पता नहीं कब बॉस के गुस्से का सामना करना पड़ जाए . आपको याद रखना चाहिए कि आपके इमोशंस न सिर्फ आपको बल्कि और लोगों को भी एफेक्ट करते हैं . अपने इमोशंस का दूसरे लोगो के ऊपर पड़े ripple effect को observe कीजिये . आपके इमोशंस से जो लोग एफेक्ट हुए है , आप उन लोगो से भी पूछ सकते है कि उनको कैसा फील हुआ . जब आप अपने इमोशंस से पड़ने वाले इफ़ेक्ट को समझने में सफल हो जाते हैं , तो आपको पता चलेगा कि आप लोगों पर किस तरह की ripple बनाना चाहते हैं।

द इमोशनल इंटेलिजेंस का दूसरा डायमेंशन : सेल्फ – मैनेजमेंट

The Second Dimension of Emotional Intelligence : Self -Management

Self – management आपकी self – awareness पर डिपेंड करती है . यह आपकी वो एबिलिटी है जो आपके इमोशंस के लिए आपकी अवेयरनेस को यूज़ करता है . जब भी आपके इमोशंस की बात होती है , आप उसे बड़े ही फ्लेक्सिबल तरीके से यूज़ करते हैं . ये है , अपनी आदतों को ऐसा रास्ता दिखाना जिससे खुद पर और दूसरों पर अच्छा असर हो . आसान भाषा में कहे तो , self – management ये जानना होता है कि हर चीज से जुड़े इमोशनल reaction को आप कैसे मैनेज कर सकते हैं . इमोशन आपके डिसिशन लेने की शक्ति को बिगाड़ सकता है इसलिए इन परिस्थितियों से खुद को कैसे उबारेंगे , ये जानना एक बहुत बड़ा स्किल है . Self – Management 319cht gheg ustan जरूरतों को पूरा करने में देरी करने के बारे में भी है . जैसे कि हो सकता है अभी आपका मन अपने उस colleague को गाली देने का कर रहा है जिसको आप पसंद नहीं करते . आप इस momentary ज़रूरत को delay कर सकते है या उसे पूरा करने से खुद को रोक सकते है क्योंकि आपको दूसरे ज़रूरी गोल्स हासिल करने है|

ऐसे सिचुएशन में आप उस colleague पर गुस्सा नहीं करेंगे क्योकि आपके पास और भी ज़रूरी गोल्स हैं जैसे की किसी प्रोजेक्ट का काम पूरा करना.खुद को रोकना आसान नहीं है इसलिए self management करने के आपके कमिटमेंट को बार -बार परखा जाएगा . आपको success तभी मिलेगी जब आप इन momentary ज़रूरतों को अपने ऊपर हावी होने नहीं देंगे . EQ test में , एक हेल्थकेयर अडमिंस्ट्रेटर , लेन , का self -Management स्कोर 93 है . जो लोग लेन के साथ काम करते है , उनका कहना है कि गरमागरम बहस के बीच भी लेन शांत और understanding बनी रहती है . लेन तब भी बिलकुल शांत रहती है जब बाकी सब लोगों के ऊपर उनके इमोशंस हावी होते है . जब कोई एक मुश्किल काम जैसे कि किसी एम्प्लोयी को काम से निकालना होता है , तब लेन बहुत ही सेंसेटिव होकर और इधर – उधर की बात न करते हुए बिलकुल साफ़ बात करती है . किसी क्राइसिस सिचुएशन में काफी लोग लेन के पास ही आते है . मेई ( Mei ) , एक रीजनल सेल्स डायरेक्टर , का self -Management स्कोर 6 ] है . जब मेई खराब मूड में होती है तो ऑफिस के सारे लोग उनके मूड से एफेक्ट होते है . उनसे नेगेटिविटी झलकती है . क्योकि वो एक लीडर है इसलिए उनके कारण सबको स्ट्रेस होता है|

सेल्फ – मैनेजमेंट स्ट्रेटेजीज Self – Management

Strategies सेल्फ – मैनेजमेंट का मतलब सिर्फ अपने इमोशंस को कंट्रोल करना नहीं है . ऑथर्स हमारे इमोशन की तुलना एक ज्वालामुखी से करते है . लावा निकलने से पहले , ज्वालामुखी के सतह के नीचे बहुत हलचल होती है . ठीक वैसे ही , गुस्से के फूटने से पहले आपके अंदर भी बहुत कुछ चलता रहता है . आपको इन्ही इमोशंस पर ध्यान देना है . बेशक , self – awareness के बिना self – management नहीं हो सकता . आप क्या फील कर रहे है , उसे पहचानिए . आप जब तक अपने फीलिंग्स को महसूस नहीं करेंगे तब तक अपने फीलिंग्स की तरफ़ respond नहीं कर सकते है . जब आप खुद को self -manage करते है , तब आप अपने लिए सक्सेस का रास्ता तैयार करते है . इसका ये भी मतलब होता है कि अब आप दूसरों को निराश नहीं करेंगे , या वे आपसे नफरत नहीं करेंगे . कई अच्छी बाते निकल कर आती है जब आप खुद के इमोशंस के बारे में जानते है ( self – awareness ) और आपको पता है कि अपने इन इमोशंस की तरफ़ कैसे रेस्पॉन्ड करना है ( self – management ) . आप अपने पेचीदा प्रॉब्लम को कंट्रोल कर सकते हैं और अपने गोल को पा सकते हैं . Self – management से आपमें फ्लेक्सिबिलिटी भी आती है . किसी भी बदलाव के सिचुएशन में आप ठीक से रिएक्ट करेंगे और आपको गुस्सा नहीं आएगा . इससे आपको सही और productive डिसिशन लेने में मदद मिलती है .

ऑथर्स एक स्ट्रेटेजी सज्जेस्ट करते है- इमोशन versus रीज़न की लिस्ट बनाएं . इमोशन versus रीज़न की लिस्ट बनाने पर आपको सही डिसिशन लेने में मदद मिलती है . ज़्यादातर आपके इमोशंस और आपके लॉजिकल mind के बीच लड़ाई चलती रहती है . दोनों साइड आपको अपनी ओर खींचते है . अगर आपको समझ नहीं आ रहा कि आपको किस साइड जाना चाहिए , तो आपको एक पेपर लेना है और बीच में एक लाइन खींचनी है . एक लिस्ट बना लेने से आपका mind साफ़ देखने लगेगा . राइट साइड के कॉलम में लिखिए कि आपके इमोशंस आपसे क्या करने को कह रहे हैं . लेफ्ट कॉलम में ये लिखिए कि आपको रीज़न देने वाला माइंड क्या कह रहा है . इसके बाद , खुद से एक सवाल पूछिए कि किस जगह आपका इमोशन आपके जजमेंट को घेर रहा है और , कहाँ आपका लॉजिकल mind आपके इमोशन के signal को अनदेखा कर रहा है . आपने शायद ऐसे पल को एक्सपीरियंस किया होगा जब आपने अपने फीलिंग्स को अपने रास्ते में आने दिया होगा . पर , हमेशा लॉजिकल रहना भी ठीक नहीं है . इससे आप एक रोबोट की तरह फील और एक्ट करते हैं . अगली बार , जब आपको समझ न आए कि आपको किस डायरेक्शन में जाना चाहिए , तो आपको इस लिस्ट की मदद लेनी चाहिए . इससे आप अपने थॉट्स को ऑर्गनाइज़ कर सकते है और बेहतर डिसिशन ले सकते है|

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द इमोशनल इंटेलिजेंस का तीसरा डायमेंशन : सोशल अवेयरनेस (The Third Dimension of Emotional intelligence : Social Awareness)

ये self -awareness की ही तरह है पर इस बार ये दूसरे लोगो के बारे में है , जब आप दूसरे लोगो के इमोशंस को जानते हैं और समझते हैं कि वे ऐसा क्यों फील कर रहे हैं . ये करना बहुत मुश्किल हो सकता है खासकर तब जब औरो के इमोशंस आपके थॉट्स और फीलिंग्स से मैच नहीं करते . अगर आप दूसरों के फीलिंग्स के बारे में सोचते हैं , तो ये आपको फोकस करने में मदद करता है . इससे आपको उस इनफार्मेशन को इकट्ठा करने में भी मदद मिलती है जिन पर आपकी नज़र पहले नहीं जाती थी . Social Awareness के दो एलिमेंट्स है- सुनना और गौर से देखना यानी observe करना . अगर आपको ये दोनों चीजें सही ढंग से करनी हैं तो आपको बात करना छोड़ना चाहिए और अपने अगले argument के बारे में भी सोचना बंद करना चाहिए . आपको selfish चिंताओं को छोड़ना चाहिए . दूसरों की ज़रूरतों को पहचाने दूसरों को सुनिए और उन पर ध्यान दीजिए , तब आपको उनकी फीलिंग्स समझ आएगी . अल्फोंसो एक फार्मास्यूटिकल सेल्स मैनेजर है और उनका social -awareness स्कोर 96 है . वे दूसरों के इमोशंस को समझते है , इस बात को लेकर ऑफिस के लोग उनकी काफी तारीफ़ करते है|

इसी कारण वे दूसरों से अपने रिलेशनशिप को अच्छा बना पाए . इसीलिए काफी लोग उनके वफ़ादार भी है . क्लाइंट्स के बीच भी अल्फोंसो बहुत हिट है और वे उनके स्टोर के कस्टमर बने रहते है . क्रैग , एक अटॉर्नी है जिनका social awareness स्कोर 55 है . वे जिस तरह से अपने साथ काम करने वाले लोगों से बर्ताव करते है उसी से उनके स्कोर का पता चल जाता है . सब कहते है कि क्रैग को पेशेंट और दूसरों के बारे में सोचने वाला होना चाहिए . इससे साफ़ पता चलता है कि क्रैग को दूसरों की फीलिंग्स और उनकी सोच के बारे में बिलकुल समझ नहीं है . लोग क्या कह रहे है , क्रैग बस उतना ही ध्यान देते है ताकि उनका जवाब दे सके . असल में क्रैग लोगों को सुनते ही नहीं , जो कि एक बहुत ही निराश करने वाली बात है . लोगों के सामने , क्रैग की पहचान ऐसी बनी है जिससे पता चलता है कि वे दूसरों के इनपुट को बिलकुल शामिल नहीं करते|

सोशल अवेयरनेस स्ट्रेटेजीज Social Awareness Strategies:-

Self – awareness खुद के अंदर झांककर और खुद को जानना है . Self – awareness बाहर देखना और लोगो के बारे में सीखना है . सोशली अवेयर रहने से आपको दूसरों की फीलिंग्स को समझने में आसानी होगी . ये इतना इम्पोर्टेन्ट क्यों है ? क्योकि आप अपने रिलेशन को मज़बूत करना सीख जाएंगे . इससे आप किसी और को बेहतर और ज़्यादा जान पाएंगे . सोशल अवेयरनेस तब होती है , जब आपको पता है कि आप अभी मदद नहीं मांग सकते क्योकि आपके दोस्त का मूड अभी ठीक नहीं चल रहा है . ये तब होता है जब आप किसी अकेले स्टूडेंट के पास जाते हैं क्योकि आपको पता है उसे दोस्त बनाने है . सोशल अवेयरनेस आपको लोगो के शब्दों से न कही गई बातो को भी समझने में हेल्प करता है , जैसे कि बॉडी लैंग्वेज को समझना . यहाँ एक स्ट्रेटेजी है जिससे आप सोशली अवेयर हो सकते है- वो है बॉडी लैंग्वेज को देखना . हम में से । बहुत से लोग कहते कुछ है और हमारा मतलब कुछ और होता है . लोगो की बॉडी लैंग्वेज को देखकर उनको समझना हमारे लिए बातों को साफ़ कर देता है . बॉडी लैंग्वेज कभी झूठ नहीं बोलती . ये देखकर आप आसानी से समझ जाते हैं कि सामने वाला असल में क्या फील कर रहा है . एक बार ये समझ आ जाए तो आपको पता होता है कि आपको क्या कहना है या क्या response देना है|

द इमोशनल इंटेलिजेंस का चौथा डायमेंशन : रिलेशनशिप मैनेजमेंट (The Fourth Dimension of Emotional Intelligence : Relationship Management)

रिलेशनशिप मैनेजमेंट के लिए जरुरत पड़ती है EQ स्किल्स की , जो हमने पहले बताई थी . ये EQ स्किल्स है- self – awareness , self – management , and social awareness . अपने रिलेशनशिप को सक्सेसफुल्ली मैनेज करने के लिए खुद के emotion को जानना चाहिए|

और फिर औरो के भी . रिलेशनशिप मैनेजमेंट के कई फायदे है . ये आपको बेहतर कम्यूनिकेट करने में हेल्प करता है जिससे आप औरो के साथ बेहतर कनेक्शन बना सकते है.आप अपने रिलेशनशिप मैनेजमेंट को जितना सुधारेंगे , उतना ही आपको उसका असर फील होगा . आप पाएंगे कि आप दूसरों को अब बेहतर तरीके से समझ रहे हैं , और आपको ये भी समझ आएगा कि दूसरों को कैसे ट्रीट करते है . अगर ट्रीटमेंट में कुछ चेंज करना है , तो वो भी कर पाएंगे . अगर आप किसी के साथ रिलेशनशिप नहीं जोड़ सकते , तो उनके सामने आपको ठीक से अपनी बातें रखने में मुश्किल आएगी . लोग आपकी बातो को सुने , इसके लिए आपको रिलेशनशिप मैनेजमेंट की प्रैक्टिस करनी पड़ेगी . ऐसा करना बहुत मुश्किल होता है खासकर स्ट्रेस वाले सिचुएशन में . ऑथर द्वारा किए गए एक स्टडी में पाया गया कि 70 % पार्टिसिपेंट्स को स्ट्रेस हैंडल करने में दिक्कत हुई . इसलिए हैरानी की बात नहीं कि रिलेशनशिप बनाना आसान नहीं होता है , खासकर काम की जगह में जहां स्ट्रेस का लेवल बहुत ज़्यादा होता है . लोग भड़के हुए होते है और बेकाबू भी . कुछ लोग तो काम की बात ही नहीं करना चाहते या फिर करते है तो बिना इच्छा के करते है . कुछ लोग एक्टिव नहीं होते और सोचते है की स्ट्रेस का माहौल उनके काबू से बाहर है . रिलेशनशिप मैनेजमेंट ही आपको इन सब सिचुएशन से बचा सकता है |

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गेल , एक चीफ फाइनेंसियल ऑफिसर है और उनका रिलेशनशिप मैनेजमेंट स्कोर 95 है . उनके साथ काम करने वाले लोग महसूस करते है कि गेल के साथ वे कभी भी बात कर सकते है . गेल दूसरों को अच्छे से समझती है और सेंसिटिव बातें करने के लिए लोगो को सेफ माहौल देती है . अपने साथ काम करने वालो के साथ गेल का बहुत ही करीबी और प्रोफेशनल रिश्ता है . जब लोगो को ऊपर उठाने की बारी आती है , तो गेल उन लोगो की प्रशंसा करना कभी नहीं भूलती जो अच्छा काम करते है . अगर आपने गलती भी की है तब भी गेल आपको नीचा नहीं दिखाती , बल्कि उस गलती से सीखने के लिए कहती है . ड्रियू ( Drew ) , एक सेल्स मैनेजर है जिनका रिलेशनशिप मैनेजमेंट स्कोर 66 है . उनके साथ काम करने वालो ने देखा कि ड्रियू उन लोगो को अपने लिए खतरा मानते थे जो उनके बातो से सहमत नहीं होते थे . ऐसा ड्रियू सबके सामने ही करते थे जिससे दूसरे लोगो पर रिप्पल इफ़ेक्ट बनता था . इससे ये होता था कि जिस एम्प्लोयी को ड्रियू अपने लिए खतरा मानते थे , उसे बाकी लोग भी खतरा मानने लगे . अपनी सोच के कारण , लोगो को सिखाने के बजाय वे लोगो के बीच दरार पैदा करते है|

रिलेशनशिप मैनेजमेंट स्ट्रेटेजीज Relationship Management Strategies:-

रिलेशनशिप पर काम करने के लिए बहुत एनर्जी और एफर्ट लगता है . ऐसा करने में बहुत झल्लाहट होती है पर इसे संभालने के लिए एफर्ट लगाना फायदा ही देगा . याद रखिये कि रिलेशनशिप मैनेजमेंट को दूसरे EQ डायमेंशन की ज़रूरत पड़ती है . आपको अपने फीलिंग्स के बारे में सेल्फ -अवेयर रहना पड़ता है . आप सेल्फ – मैनेजमेंट का इस्तेमाल करके अपने फीलिंग्स को दूसरों के सामने एक्सप्रेस करते हैं . आखिर में , सामने वाला क्या चाहता है और फील कर रहा है , सोशल अवेयरनेस की मदद से उस पर अपना response देते हैं अपने रिलेशनशिप मैनेजमेंट को सुधारने के लिए ऑथर ने जो स्ट्रेटेजी दी है , वो है ओपन रहना और जानने की इच्छा रखना . हाँ , अपने साथ काम करने वाले लोगो को जानना आसान नहीं है . आप इससे घबरा भी सकते है . पर , लोगो से अपना रिलेशनशिप बनाए रखना आपके जॉब का ही एक हिस्सा होता है . अपने साथ काम करने वालो के साथ खुलना , आपके लिए सबसे पहला स्टेप है . आप अपने बारे में उन्हें बताते है . अगर आप बहुत ज़्यादा खुलने में अनकम्फर्टेबल है तो सिर्फ छोटी बातो से ही शुरुवात कीजिये . जब लोग आपके बारे में जानने लगेंगे तो वे आपको कभी गलत नहीं समझेंगे|

एग्ज़ाम्पल के लिए , आपके प्रेजेंटेशन के दौरान कोई लेट पहुँचता है तो आपके चेहरे पर गुस्सा साफ़ दिखेगा और लोगो को लगेगा की आप घबराए हुए और स्ट्रिक्ट है . पर , अगर आप सबको बता चुके होंगे कि आप पहले आर्मी में थे तो उन्हें पता होगा कि आपके लिए टाइम के क्या मायने है . ओपन होना और जानने की इच्छा रखना एक दो तरफ़ा सड़क जैसा है . आपको लोगो के बारे में ज्यादा जानना चाहिए ताकि वे आपको गलत न समझे . लोगो से उनके बारे में सवाल पूछिए और उनके जवाब पर भी अपना इंटरेस्ट दिखाइए . जितना हो सके लोगो को judge करने वाले सवालों को न पूछिए एग्जाम्पल के लिए , अगर आप किसी से पूछते हैं , ” आपने आखिर फिलोसोफी की पढ़ाई की ही क्यों है ? ” , सामने वाला अनकम्फर्टेबल और डिफेंसिव फील करने लगेगा . ऐसे पूछने के बजाए आपको पूछना चाहिए – ” वाह ! फिलोसोफी . आपको इसके बारे में सबसे ज़्यादा क्या पसंद है ? ” आपका लहजा फ्रेंडली लगेगा और वो भी आपसे फ्रेंडली तरीके से पेश आएगा .

कन्क्लूज़न

आपने इमोशनल इंटेलिजेंस , यानी कि EQ के बारे में सीखा . सक्सेस पाने में आपके EQ का बहुत बड़ा रोल होता है . Emotional intelligence खुद के और दूसरों के इमोशंस को समझ सकने की आपकी एबिलिटी होती है .आप इस एबिलिटी का यूज़ खुद को और अपने रिलेशनशिप को इम्प्रूव करने के लिए करते है|

आपके EQ के चार डायमेंशन है- सेल्फ – अवेयरनेस , सेल्फ – मैनेजमेंट , सोशल- अवेयरनेस , और रिलेशनशिप मैनेजमेंट . सेल्फ- अवेयरनेस ये जानना होता है कि आप हर सिचुएशन में कौन सा इमोशन फील कर रहे हैं . आप अपने फीलिंग्स का सामना कर पाते हैं क्योकि आपको पता है कि ऐसा करने से आप खुद को और भी बेहतर जान सकते है . सेल्फ – मैनेजमेंट आपके सेल्फ – अवेयरनेस पर डिपेंड करता है . आपको अपने इमोशनल रिएक्शन का पता होता है इसलिए आप इसे खुद पर हावी नहीं होने देते . खुद को सही से मैनेज करने की वजह से आप जल्दबाज़ी में डिसिशन लेने से बच सकते हैं . इससे आप ख़ुद को वो बातें कहने से रोक सकते हैं जो आप कहना नहीं चाहते . सोशल -अवेयरनेस , सेल्फ -अवेयरनेस की ही तरह है पर ये दूसरों के बारे में है . दूसरों की फीलिंग्स को पहचानने और समझने के लिए दो रास्ते है : उन्हें सुनना और उनको ऑब्ज़र्व करना . आप दूसरों को सुने तो सिर्फ इसलिए नहीं कि आपको उनके साथ बात करनी है . उनके बेहेवियर को भी आप ओब्ज़र्ब कीजिये ताकि आपको पता हो कि आप उन्हें कैसे एप्रोच कर सकते है . रिलेशनशिप मैनेजमेंट को सारे EQ स्किल्स की ज़रूरत पड़ती है|

एक अच्छे रिलेशनशिप को बनाने में टाइम तो लगता है पर इसके बहुत सारे फायदे है . सेल्फ – अवेयरनेस और सोशल अवेयरनेस को यूज़ करके आप इमोशंस को उनके जगह रखते है . फिर , आप उसके आगे बढ़कर कम्यूनिकेट करते है.रिलेशनशिप मैनेजमेंट का मतलब झगड़ों को बेहतर सुलझाना भी है . खुद पर और दूसरों के साथ अपने रिलेशनशिप पर काम करना आसान नहीं है . वैसे भी , हम सभी अलग अलग नज़रिए और पर्सनालिटी के होते है . पर , ये सब ज़रूरी है क्योकि इससे आप बेहतर इंसान बनते है . यही नहीं , आप मौकों और रिलेशनशिप के लिए खुद को खोल देते है . आपको खुद पर काम करना नहीं छोड़ना चाहिए . रिलेशनशिप बनाने के लिए हमेशा याद रखिये कि कोई भी आदमी एक island की तरह अकेला नहीं रह सकता . आपको लग सकता है कि आप सब कुछ अकेले ही कर सकते है पर ऐसा पॉसिबल ही नहीं है . हम औरो के साथ जो कनेक्शन बनाते है , वही हमारे लाइफ को मीनिंगफुल और संतोषजनक बनाते है . खुद को इम्प्रूव कीजिये क्योकि आप इस के काबिल है दूसरों को भी आपका सबसे बेहतर रूप दिखना चाहिए|

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