A LIFE CHANGING FACT

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  •                A Life Changing Fact
  1. अभी तक जो मैंने किया सो किया लेकिन अब आगे से अनुशासन कड़े नियम में करना हैै, मुझे यह फर्क नहीं पड़ता कि मैंने बीते समय में क्या खोया क्या पाया! लेकिन अब मुझे अपना लक्ष्य धारण कर उस पर सटीक वार करना है, जिंदगी का हर पल ऐसे जीना है, जैसे वह पल मेरे जिंदगी का आखरी पल है!मैं क्या नहीं कर सकता मुझ में क्या कमी है ईश्वर ने मुझे वह सब कुछ दिया है जो दूसरों के पास है! फिर मैं उनसे पीछे क्यों रहूं, क्यों मैं अपने आत्मसम्मान से समझौता करूं! 
  • मेरे पास हारने के लिए कुछ नहीं है! लेकिन जीतने के लिए सब कुछ है फिर मैं क्यों समझौता करूं जो 24 घंटे का समय सबको मिला है! वही समय मुझको भी मिला है! तो फिर क्या वजह है जो मैं दीन हीन की तरह अपनी जिंदगी व्यतीत कर रहा हूंं, क्या ईश्वर ने मुझे उन्हीं पशुओं की भांति जिंदगी गुजारने के लिए इस सुंदर संसार में भेजा हैैै|मैं अपने भाग्य का रोना कब तक रोता रहूंगा बल्कि मुझे तो उस सर्वव्यापी ईश्वर का धन्यवाद करना चाहिए| 
  • क्योंकि उन्होंने मुझे शारीरिक तथा मानसिक दोनों रूप से स्वस्थ बनाया है| हमारे कई महापुरुष जो शारीरिक रूप से विफल होने के बावजूद दुनिया से अपना लोहा मनवाया अपना डंका बजाया तो क्यों मैं छोटी-छोटी क्षणभंगुर समस्याओं के आगे अपने आप को सौंप दूं|क्या मेरे मां-बाप के मन में मुझे पालते हुए कोई महत्वकांक्षा नहीं आई होगी क्या  वे अब भी हमारा साथ केवल दीन हीन एवं गरीबी में गुजारने के लिए दे रहे हैं! भला कौन मां-बाप नहीं चाहेगा कि उसकी संतान आसमान की बुलंदियों को ना छुए!

जिस प्रकार किसान अपने खेतों में बीज बोते हुए पूर्ण विश्वास रखता है कि वह बीज एक न एक दिन बड़ा होकर फसल या विशाल वृक्ष का रूप धारण करेगा और अंततः वह बीज पूर्ण रूप से उसके विश्वास पर खरा उतरती है! और जब वह किसान अपनी मेहनत की फसल को लहलहाते हुए देखता है तो उसके सारे ही परिश्रम उसकी थकान यूं दूर हो जाती है मानो कई दिनों से भूखे को भोजन मिल गया हो! ठीक उसी प्रकार मेरे मां-बाप भी अति सुंदर मनमोहक हृदय स्पर्शी पल की इंतजार में हर क्षण रहते हैं! 

तो यह क्या मेरा कर्तव्य नहीं बनता की मैं उनके इस विश्वास पर खरा उतरू! परेशानियां किसकी जिंदगी में नहीं है, जिंदगी का ही दूसरा नाम संघर्ष है, फिर हम इस छोटे से संघर्ष से डरकर हार क्यों माने क्यों बुरी भावनाओं की बहकावे  में मैं आऊं! मेरे एक तरफ गरीबी तुच्छता अविश्वास है, 

तो दूसरी तरफ सम्मान प्यार विश्वास तथा मेरी माता पिता के चेहरे पर वह खुशी है जिसके लिए उन्होंने वर्षों कड़ी मेहनत कठोर तपस्या की है! क्या अब मेरा कर्तव्य नहीं है मैं उनकी हर इच्छाएं जो उन्होंने मेरे लिए कुर्बान कर दी उनको पूरा करूं जीवन में सोच ऊंची होनी चाहिए|

तुच्छ नहीं मुझे किसी से तुलना नहीं बल्कि खुद पर अनुशासन तथा नियम का चाबुक चलाकर सत्य मेहनत निष्ठा तथा धैर्य के मार्ग पर एकाग्र होकर चलना चाहिए! हमारी जिंदगी निश्चित समय के लिए है फिर मैं उस हीरे जैसे कीमती समय को घुट-घुटकर अपने भाग्य को कोश कर क्यों बिताऊं |

इस संसार में विषयों की कमी नहीं है लेकिन मुझे यह तय करना होगा मैं किस प्रकार का विषय सुनता हूं ¡ऐसा विषय जो मुझे सफलता तथा पहचान की बुलंदी पर पहुंचा सकती हैै, या ऐसा विषय जो दरिद्र गरीब एवं पशु समान जिंदगी जीने में मजबूर करें! मुझे भाग्य के भरोसे रहकर ऐसे खूबसूरत एवं कीमती जिंदगी को हाथ से फिसलने नहीं देना चाहिए| 

इस समय मेरा जो भी कर्तव्य है उसको एकाग्रता एवं कठोर परिश्रम से करना है¡ ऐसा कोई काम नहीं करना है जो मुझे असफलता दरिद्रता के ब्लैक होल में ले जाए¡ जिंदगी में ऐसा कुछ कर गुजर ना है ताकि जब भी मेरा नाम लिया जाए मेरी ईश्वर समान माता पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो जाए! मेरे माता-पिता के चेहरे पर वह मुस्कान आए जिसके लिए उन्होंने वर्षों कठोर तप किया जिस दिन भी यह समय आएगा उस दिन मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल होगा! 

उसी दिन मेरा इस संसार में आने का उद्देश्य पूरा हो जाएगा! लोग कहते हैं हर चीज कहना आसान होता है, करना नहीं लेकिन मैं उनकी इस भ्रांति को तोड़ कर दिखाऊंगा की अगर संकल्प सच्चे मन हृदय स्पर्शी हो तो संसार का प्रत्येक आपके इस कर्म रूपी यज्ञ में आहुति देने को तैयार हो जाता है|

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