अमीर कैसे बनें? | जाने Rich बनने का रहस्य

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अमीर कैसे बनें? | जाने Rich बनने का रहस्य
अमीर कैसे बनें? | जाने Rich बनने का रहस्य

पैसे सेव करना ऐसा ही है जैसे मीठा खाना . शुरू में आप खुद को रोक नहीं पाते लेकिन फिर धीरे – धीरे आपका मन भर जाता है।

पैसे के मामले में समझदारी दिखाना एक अच्छा आईडिया लगता है लेकिन फिर जल्द ही आपके अंदर वो जोश और मोटिवेशन कम होने लगता है . फिर आप पहले वाले रूटीन पर आ जाते हो।

जब चाहे तब पैसे खर्च कर लिए और कोई हिसाब – किताब भी नहीं रखा . इस समरी में आप पढोगे कि अमीर बनने के लिए बजटिंग करना जरूरी नहीं है।

इस बुक के ऑथर रमित सेठी का मानना है कि बजटिंग सिर्फ समय की बर्बादी है . लोगों को बजट बनाने की जरूरत नहीं है बल्कि उन्हें अपने पैसे खर्च करने की आदत पर ध्यान देना चाहिए।

इस समरी में आप सीखोगे कि अपने क्रेडिट कार्ड का कैसे बेहतर इस्तेमाल किया जाए और आप सीखोगे कि पैसे को सोच – समझ कर खर्च करना किस तरह एक पॉवरफुल हैबिट बन जाती है।

ये समरी हमें सिखाएगी कि लाइफ में किये गए छोटे – छोटे बदलाव हमे अमीरी की तरफ लेकर जाते है।

अपने क्रेडिट कार्ड को ऑप्टिमाइज़ करें

अक्सर लोग ” क्रेडिट कार्ड ” के नाम से ही डरते है . असल में क्रेडिट कार्ड टर्म अपने आप में ही काफी नेगेटिव साउंड करता है।

इसकी एक बड़ी वजह ये कि जो लोग इसे सही ढंग से मैनेज करना नहीं जानते . उनका क्रेडिट कार्ड को लेकर काफी नेगेटिव फीडबैक होता है।

क्रेडिट एक ऐसी चीज़ है जो आपको समझनी होगी और अमीर बनने के लिए आपको इसमें एक्सपर्ट बनना होगा . लोग बड़ी – बड़ी शॉपिंग करते वक्त क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते है।

लेकिन जिनका क्रेडिट अच्छा है वो इस शॉपिंग से काफी पैसा बचा सकते है . जी हाँ , एक अच्छा क्रेडिट होना आपके पैसे बचा सकता है।

लेकिन सबसे पहले ये समझना होगा कि क्रेडिट होता क्या है ?

क्रेडिट के दो फैक्टर है , जो है क्रेडिट रिपोर्ट और क्रेडिट स्कोर . आपका क्रेडिट रिपोर्ट आपके एकाउंट और पेमेंट हिस्ट्री के बारे में बेसिक इन्फोर्मेशन देता है।

ये लेंडर्स यानी लोन देने वालों को ये जानने में हेल्प भी करता है कि आप दूसरे लेंडर्स को भी पे कर पा रहे हो या नहीं . साथ ही इसमें आपका पेमेंट बिहेवियर भी शामिल होता है और ये भी पता चलता है कि कहीं आपकी कोई लेट पेमेंट तो नहीं है।

आपका क्रेडिट स्कोर एक नंबर है जो लेंडर्स को बताता है कि आपको क्रेडिट देने में उन्हें रिस्क है या नहीं है और अगर है तो कितना रिस्क है।

क्रेडिट स्कोर नंबर 300 से 850 के बीच कुछ भी हो सकता है . लेंडर इस नंबर और आपके क्रेडिट रिपोर्ट के बेस पर डिसाइड करेगा कि उसे आपको कितना पैसा देना चाहिए।

क्रेडिट स्कोर जितना हाई हो , उतना बैटर है . इसलिए एक हाई क्रेडिट स्कोर के लिए जितना हो सके अपनी पेमेंट जल्द से जल्द जमा कर दे . अब आप पूछोगे , ये चीज़े जानना हमारे लिए क्यों जरूरी है ?

वो इसलिए क्योंकि अच्छा क्रेडिट आपको इंटरेस्ट चार्ज में हेल्प करता है . गुड क्रेडिट स्कोर आपके ढेर सारे पैसे बचा सकता है . मान लो आप घर खरीदने की सोच रहे है।

बैंक हाई इंटरेस्ट चार्ज के साथ लोन देता है . लेकिन अगर आपका गुड क्रेडिट स्कोर है तो ये इंटरेस्ट आराम से पे हो सकता है।

क्रेडिट कार्ड को लेकर कई तरह के नेगेटिव रिव्यु सुनने को मिलते है . जैसे कि लेट पे करने पर आपको भारी – भरकम चार्ज देना पड़ता है.कई बार आपके अकाउंट में ऐसे चार्ज होते है जिनके बारे में आपको पता ही नहीं होता।

लेकिन ये सब आपके साथ तभी होता है जब आप अपना क्रेडिट कार्ड ठीक से मैनेज़ नहीं कर पाते . लोग क्रेडिट कार्ड ऐसे यूज़ करते है जैसे वो उनके लिए पैसे का एंडलेस सोर्स हो . वेल , क्रेडिट कार्ड को हम कुछ इसी तरह देख सकते है।

लेकिन ये एंडलेस सोर्स फ्री में नहीं आता है , इसके अपने साइड इफेक्ट्स भी है . जैसे मान लो आपने कोई पेमेंट मिस कर दी तो आपका क्रेडिट स्कोर ड्राप हो सकता है।

जिस कंपनी से आपने क्रेडिट कार्ड लिया है वो आपका annual परसेंटेज रेट या APR बढ़ा सकती है और सबसे बड़ी बात ये कि आपको लेट फी पे करना पड़ सकता है।

लेकिन आप टाइम पर सारी पेमेंट करके एक्स्ट्रा चार्ज देने से बच सकते है . अपने क्रेडिट कार्ड को ऑप्टीमाईज़ करने का ये एक तरीका है।

ऑप्टीमाईज़ करने का दूसरा तरीका है कि अपनी क्रेडिट कार्ड कंपनी को कॉल करो . उनसे पूछिए कि क्या वो आपके फीस या सर्विस चार्ज माफ़ कर सकते है।

एक पेमेंट annual फी की होती है . ये वो फीस है जो आपको कार्ड यूज़ करने के लिए पे करनी पडती है . लेकिन आप क्रेडिट कार्ड कंपनी से बात करके इसे कम करने या माफ़ करने के लिए कह सकते है

मार्केट में कई सारी क्रेडिट कार्ड कंपनियां है जो ये फीस नहीं लेती ताकि उन्हें ज्यादा से ज्यादा कस्टमर मिल सकें।

तो अगर आप अभी भी annual फी पे कर रहे है तो आप कंपनी को बोलकर इसे माफ़ करवा सकते है और अगर वो ऐसा नहीं करते तो आप annual फी – फ्री कार्ड चूज़ कर सकते है।

आखिर ट्राई करने में क्या हर्ज़ है ! ऑथर रमित के लिए तो ये आईडिया कई बार काम आया . ऑप्टीमाईज़ करने का दूसरा तरीका है कोशिश कीजिये कि आप लोअर एपीआर पर नेगोशिएट कर सके।

आपका एपीआर या annual परसेंटेज रेट वो इंटरेस्ट रेट है जो कंपनी आपको क्रेडिट कार्ड यूज़ करने के लिए देती है।

आमतौर पर एपीआर 14 % पर होता है . हाँ , सुनने में ये काफी बड़ा लगता है लेकिन फिर ये भी एक फैक्ट है कि कंपनी आपको काफी बड़ी रकम उधार दे रही है।

तो एक तरह से ये आपके लिए विन – विन सिचुएशन है . तो इसलिए कंपनी को कॉल करके उनसे कम एपीआर के लिए पूछो।

अगर वो पूछे कि उन्हें ऐसा क्यों करना चाहिए तो उन्हें ऐसा करने के वाजिब कारण दो . जैसे कि आप कई महीनों से लगातार अपने बिल्स टाइम पर पे करते आये है।

उनसे ये भी कहो कि आप कुछ और कंपनियों को भी जानते हो जो लोअर एपीआर ऑफ़र करती है , इसलिए आप किसी और कंपनी का क्रेडिट कार्ड ले सकते हो।

हालाँकि एक ही कंपनी का लॉयल कस्टमर बने रहने के कुछ अपने फायदे भी है . लेंडर्स आपकी लॉन्ग क्रेडिट हिस्ट्री एप्रीशिएट करेंगे।

फिर से याद दिला दे , लेंडर्स ये देखना चाहते है कि क्या आप भरोसे के लायक है या नहीं , क्या आप टाइम पर पेमेंट कर पाएंगे या नहीं।

अपने क्रेडिट कार्ड को ऑप्टीमाईज़ करने के लिए लोअर फी और एपीआर के लालच में आने की जरूरत नहीं है।

बैंकों को छोड़िये

क्रेडिट कार्ड की तरह बैंक भी उतने ही बॉसी होते है . अक्सर बैंक यंग लोगों का फायदा उठाने की कोशिश करती है।

यंगस्टर्स को इंटरेस्ट रेट और फीस जैसे टॉपिक थोड़े डराते है . इसलिए वो बिना सवाल – जवाब किये जो भी पे करना है , पे कर देते है।

लेकिन इन कॉन्सेप्ट्स को समझने के सिरदर्द को दूर किया जा सकती है।

आप पूछोगे क्यों और कैसे ? तो इसका जवाब है ऑनलाइन बैंकिंग . ऑनलाइन बैंकिंग बैंक के लिए एक अच्छा तरीका है कि वो अपने कस्टमर्स का इंटरेस्ट रेट बढा सके।

पैसे से जुडी हर सर्विस के लिए लोग बार – बार बैंक जाना पसंद नहीं करते . इसके बजाये वो कोई सुविधाजनक तरीका ढूंढना चाहते है और ऐसे में ऑनलाइन बैंकिंग एक अच्छा ऑप्शन नज़र आता है।

जो सेविंग आप ऑनलाइन बैंक में डालते हो , वो बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है . ये वो फीस भी नहीं लेती जो नॉर्मली आपको किसी रियल बैंक चार्ज करती है।

तो चलो ऑनलाइन बैंक और फिजिकल बैंक के बीच इंटरेस्ट रेट को कम्प्येर कर लेते है . अगर आप $ 1000 जमा करते हो तो दो अलग – अलग बैंक के इंटरेस्ट रेट अलग होंगे।

ऑनलाइन बैंक्स अक्सर 3 % रेट से स्टार्ट करते है . एक साल में आप उस इंटरेस्ट रेट से $ 30 कमा सकते हो।

अब फिजिकल बैंक्स की बात करते है . ये बैंक्स आमतौर पर सिर्फ 0.5 % इंटरेस्ट रेट देते है।

यानी आपको अपने $ 1000 पर हर साल $ 5 मिलेगा . तो देखा आपने कितना फ़र्क है दोनों में ?

रमित ने अपना ऑनलाइन बैंक अकाउंट कैसे सेट – अप किया ? उन्होंने चेकिंग और सेविंग दोनों ऑनलाइन अकाउंट खोले थे।

चेकिंग अकाउंट वो होता है जहाँ आप पैसे जमा कर सकते हो और निकाल सकते हो . इसके लिए आप डेबिट कार्ड या चेक का यूज़ कर सकते हो।

रमित की इनकम इसी चेकिंग अकाउंट में जाती हैफिर वो पैसे अपने बाकि के एकाउंट में ऑनलाइन ट्रांसफर कर देते है।

बैंक हमे इंटरेस्ट रेट भी ऑफर करते है जब आप अपने चेकिंग एकाउंट में पैसे जमा करते हो . सेविंग एकाउंट , जैसा कि नाम से ही पता चलता है , वो अकाउंट है जिसमे आप स्पेशल मौको जैसे होलीडे और फेस्टिवल के लिए पैसे सेव करते हो।

पहले चेकिंग और सेविंग अकाउंट के बीच सिर्फ इंटरेस्ट का फर्क होता था . पहले सिर्फ सेविंग अकाउंट में इंटरेस्ट रेस्ट होता था , चेकिंग अकाउंट में कुछ भी नहीं लेकिन जैसा कि हमने बताया है , कई बैंक अब दोनों एकाउंट पर इंटरेस्ट रेट ऑफर करते है।

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तो इन दोनों एकाउंट के बीच वाकई में क्या फर्क है ? फ़र्क ये है कि आपको अपने चेकिंग अकाउंट से ही पैसे विदड्रा करने चाहिए।

सेविंग अकाउंट को टच भी मत करो , क्योंकि इसमें आपके पैसे सेव होते है और आपको अपने अकाउंट कैसे सेट करने चाहिए ?

तो रमित हमे कुछ ऑप्शन देते है पहला वाला सबसे बेसिक ऑप्शन है . अपने लोकल बैंक में चेकिंग अकाउंट के साथ एक सेविंग अकाउंट भी खोल लो।

बैंक से फीस के बारे में पूछो . अगर उस बैंक में annual चार्ज वगैरह है तो किसी और बैंक में पता करो जहाँ ये सब चार्ज ना हो।

सेकंड ऑप्शन बेसिक ऑप्शन और small ऑप्टीमाईज़ेशन का कॉम्बीनेशन है . किसी लोकल बैंक में एक नो फी – चेकिंग अकाउंट खोल लो।

उसके बाद कोई ऑनलाइन बैंक ढूंढो जो सेविंग अकाउंट पर हाई इंटरेस्ट रेट देता हो . इस तरह से आप जब चाहे तब ईज़ीली अपने चेकिंग अकाउंट से पैसा निकाल पाएंगे और आपका पैसा ईज़ीली ग्रो होता रहेगा।

कैसे ? सिंपल है , इसे अपने सेविंग अकाउंट के डालकर . थर्ड ऑप्शन है एडवांस्ड और फुल ऑप्टीमाईज़ेशन का कॉम्बीनेशन . इसके लिए अलग – अलग बैंक में कई सारे चेकिंग अकाउंट खोल लो।

ये इसलिए है ताकि डिसाइड किया जा सके कि कौन सा बैंक बेस्ट इंटरेस्ट और सर्विस प्रोवाइड करता है . रमित ने भी थर्ड ऑप्शन चूज़ किया था . उनका एक चेकिंग अकाउंट लोकल बैंक में है और दूसरा चेकिंग अकाउंट ऑनलाइन बैंक में।

आप सेम यही चीज़ सेविंग अकाउंट के साथ भी कर सकते है . ऑप्शन आपको खुद चूज़ करना होगा जो आप अपनी फाईनेंशियल पोजीशन के हिसाब से डिसाइड कर सकते हो . क्या आप एक बिना झंझट का अकाउंट चाहते हो ?

फिर आपको फर्स्ट ऑप्शन चूज़ करना चाहिए . पर रमित कहते है कि अपने सामने लिमिटेड ऑप्शन मत रखो . क्यों ना सेकंड या थर्ड ऑप्शन ट्राई किया जाए ?

ये दोनों ऑप्शन गारंटी के साथ आपके पैसे ग्रो करने में हेल्प करेंगे . कोई भी बैंक चूज़ करते वक्त तीन चीज़ों का ध्यान रखना होगा : ट्रस्ट , कन्विनीएंश और फीचर्स।

ट्रस्ट तब होता है जब बैंक आपसे कोई हिडन यानी छुपे हुए चार्ज या फीस नहीं लेता . बड़े बैंक्स हमेशा अनलिमिटेड कस्टमर्स बनाने पर जोर देते है।

इसलिए वो चुपके से आपके अकाउंट में से अपनी फ़ीस काट लेते है . आप चाहे तो अपने दोस्तों से पता कर सकते है कि कौन सा बैंक भरोसे के लायक है।

एक और तरीका है कि बैंक की वेबसाईट पर जाकर देखे . अगर वो अपनी फीस को लेकर ट्रांसपेरेंट है तो समझ लो उस पर ट्रस्ट किया जा सकता है।

कन्विनिएंस यानि ईज़ी एक्सेस . आपके लिए पैसा मैनेज करना ईज़ी होना चाहिए और बैंक को भी बढिया कस्टमर सर्विस प्रोवाइड कराने पर फ़ोकस करना चाहिए।

अगर आपको कोई प्रॉब्लम है तो उन्हें तुरंत आपकी मदद करनी चाहिए . फीचर्स को हम वैल्यू एडेड सर्विसेज़ के तौर पर देख सकते है . जैसे कि मान लो बैंक हाई इंटरेस्ट रेट ऑफर करता है और साथ ही पैसे को ट्रांसफर करने की सुविधा फ्री में देता है।

सचेत खर्च (Conscious Spending)

जब आप सोच – समझ कर खर्च करते हो तो इसका मतलब आप अपने पैसे की वर्थ समझते हो।

कितनी बार आपके साथ ऐसा हुआ कि ज़्यादा खर्च करने के चक्कर में आपका बज़ट गडबडा गया ?

रमित भी कई बार ऐसी सिचुएशन से गुजर चुके है . अपनी हर खरीददारी का ट्रेक रिकॉर्ड रखना कोई सोल्यूशन नहीं है , बल्कि असल में ये तरीका जरा भी इफेक्टिव नहीं है।

बात बजट की करे तो बजटिंग सिर्फ थ्योरी में अच्छी लगती है . प्रेक्टिकली अगर देखा जाए तो कोई भी एक – एक पैसे के खर्चे का हिसाब नहीं रख सकता क्योंकि ये बोरिंग भी है और थकाने वाला काम भी . लेकिन रमित के पास इसका एक सोल्यूशन है।

आप एक कांशस स्पेंडिंग प्लान क्रिएट कर सकते हो . ये प्लान एक तरीका है जिससे आप हर महीने पैसे खर्च भी कर पाओगे और इन्वेस्ट भी और आपकी सेविंग भी होती रहेगी।

आपकी लाइफ से अब वो टाइम जाने वाला है जब आप सोच – सोच कर परेशान होते थे कि आखिर आपका पैसा गया तो गया कहाँ . कांशस स्पेंडिंग प्लान थ्रिफ्ट यानी कंजूस बनने पर फोकस करता है।

आप शायद इस वर्ड को सुनकर ना – भौं सिकोड़ ले . तो क्या आपको सस्ते में काम चलाना पड़ेगा ? जी नहीं , थ्रिफ्ट यानी कंजूस होने और चीप होने में ज़मीन – आसमान का फर्क है।

थ्रिफ्ट होने का मतलब है : सिर्फ उन्ही चीजों पर खर्च करना जो आपको चाहिए . थ्रिफ्ट होने का मतलब ये नहीं है कि आप अपने खर्चों में कटौती कर ले बल्कि ये हमे डिसाइड करने में हेल्प करता है कि हम उन्ही चीजों पर खर्च करे जो हमारे लिए वाकई में इम्पोर्टेट है।

लोग अक्सर शिफ्टिंग को मुश्किल इसलिए समझते है क्योंकि वो डिसाइड ही नहीं कर पाते कि उनके लिए क्या इम्पोर्टेट है और क्या नहीं . अब जैसे लीज़ा को ही ले लो।

वो साल के करीब $ 5000 तो जूतों पर खर्च करती है . यानि अगर मान के चले कि एक जोड़ी जूते की कॉस्ट $ 300 है तो उसके पास 15 जोड़ी जूते है।

आप शायद सोच रहे होंगे ” ये तो कोई कंजूसी नहीं है ! लेकिन हम कहते बिल्कुल है . लीज़ा को अच्छी खासी सैलरी मिलती है . वो अपनी एक रूममेट के साथ एक छोटा सा फ़्लैट शेयर करती है।

उसके पास कोई होम में इस्तेमाल होने वाली मशीन या गैजेट भी नहीं है और सबसे बड़ी बात तो ये है कि लीज़ा ने कई इन्वेस्टमेंट कर रखी है।

हर महीने की शुरुवात में वो कुछ पैसे अलग से अपनी सेविंग और इन्वेस्टमेंट के लिए रख देती है . पर लीज़ा को जूतों का बड़ा शौक है , ये उसके लिए इम्पोर्टेट शॉपिंग है।

यही वजह है कि वो उसका खर्चा सिर्फ जूतों पर होता है . इसलिए वो बाकि चीजों पर कोम्प्रोमाईज़ करती है ताकि वो मनपसंद जूते ले सके।

कांशस स्पेंडिंग प्लान के चार फैक्टर होते है-

  1. फिक्स्ड कॉस्ट
  2. इन्वेस्टमेंट
  3. सेविंग्स
  4. गिल्ट फ्री स्पेंडिंग मनी,मन्थली फिक्स्ड कॉस्ट

ये वो चीज़े है जिनके लिए आपको पे करना पड़ता है . जैसे एक्जाम्पल के लिए रेंट , रोज़मर्रा के ज़रुरत का सामान और स्टूडेंट लोन।

आपको अपनी इनकम से 50-60 % इस फैक्टर में देना होगा.लेकिन आप ये फिगर आउट कैसे करेंगे ?

सबसे पहले तो अपने फिक्स्ड कॉस्ट की लिस्ट बना लो . ये उनमें से कुछ भी हो सकते है जो हमने ऊपर बताये है।

आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट , ग्रोसरी और कपड़े वगैरह एड कर सकते हो . अगर आप नहीं जानते कि किस चीज़ पर आप कितना खर्च करते है तो थोडा पता लगाइए।

पिछले तीन महीने के अपने क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट या शॉपिंग रीसीट पर एक नज़र डालिये।

फिर सबको एड करके लिखिए . एक बार आपने ये कर लिया तो उसमे 15 % ” जस्ट इन केस ” कैटेगरी एड कर दो।

इनमे आपके हर महीने के खर्चे शामिल नहीं है बल्कि वो खर्चे है जो अचानक से कभी – कभार हमे करने पड़ते है।

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जैसे कि कार की रिपेयरिंग करवाना या फिर किसी खास मौके के लिए कपड़े खरीदना या ड्राई क्लीनिंग।

रमित ऐसे अनएक्स्पेक्टेड खर्चों के लिए हर महीने $ 150 अलग से रख लेते थे . लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट : इस फैक्टर के लिए आप अपने 401 ( के ) या इंडीविजुअल रिटायरमेंट अकाउंट के लिए अलग से पैसे रखते है।

ये वो एकाउंट है जो आपका रिटायरमेंट या पेंशन फंड होल्ड करते है।

रिटायरमेंट या पेंशन फंड होल्ड करते है . जो अमाउंट आप इसमें डालेंगे , आपकी सैलरी का 10 % होना चाहिए . क्या आप अपनी सैलरी के 10 % हिस्से को लेकर श्योर नहीं है कि उसका क्या करना चाहिए ?

तो हम बताते है , ऑनलाइन आपको कई सारे इन्वेस्टमेंट केलकुलेटर मिल जायेंगे जिनसे आप पता लगा सकते है कि आपके पेंशन फंड में कोंट्रीब्यूशन के हिसाब से आपको कितना return मिलेगा।

इससे आपको डिसाइड करने में हेल्प मिलेगी . सेविंग गोल्स : ये फैक्टर किसी भी टाइप का गोल हो सकता है चाहे उसे अचीव करने में कितना ही टाइम लगे।

ये क्रिसमस गिफ्ट के लिए सेविंग करने जितना छोटा भी हो सकता है , या शादी के खर्चे के लिए या फिर लॉन्ग टर्म गोल जैसे घर की ईएमआई पे करने के लिए भी हो सकता है।

यहाँ सीक्रेट बस एक ही है कि जितना जल्दी हो सके सेविंग स्टार्ट कर दो . आप सेविंग जितने लंबे समय के लिए करेंगे , उतना ही कम अमाउंट आपको हर महीने बचाना होगा।

सुनने में एकदम सिंपल लगता है ना ? लेकिन लोग शायद ही कभी इस एडवाईस को फॉलो करते हो।

इसलिए इसे और रियलिस्टिक बनाने के लिए , इसमें नंबर एड कर दो . अब जैसे कि आप अपने ट्वेंटीज़ में शादी कर लेना चाहते हो और आपने एक रफ एस्टीमेट तो बना ही लिया होगा कि शादी में कितना खर्च आयेगा।

तो आपको बीस साल का होते – होते सेविंग स्टार्ट कर देनी चाहिए।

आप अगर महीने का $ 333 भी बचाते हो तो आगे चलकर आपको हर महीने पैसे सेव करने में उतनी मुश्किल नहीं होगी बजाए इसके कि जब आप ट्वेंटी – सिक्स में सेविंग स्टार्ट करते हो . सेविंग गोल्स के लिए अपनी इनकम का 5-10 % अलग से रख दो।

गिल्ट फ्री स्पेंडिंग मनी

अपनी मनपसंद चीज़े खरीदने पर आपको गिल्ट नहीं होना चाहिए।

इसलिए रमित आपको अपने बजट में गिल्ट फ्री स्पेंडिंग शामिल करने के लिए एनकरेज़ करते है।

लेकिन सवाल ये है कि इस फैक्टर को केलकुलेट कैसे करेंगे ? इसे समझने के लिए हम ब्रायन का एक्जाम्पल लेंगे।

टैक्स वगैरह कटने के बाद ब्रायन की annual इनकम है $ 48,000 . यानि महीने के $ 4000 . उसने अपनी इनकम को सही तरीके से डिवाइड करने के लिए कांशस स्पेंडिंग प्लान का यूज़ किया।

मन्थली फिक्स्ड कॉस्ट पर ब्रायन अपनी सैलरी का 60 % अलोकेट करता है और ये अमाउंट per मन्थ $ 2400 होता है।

लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट के लिए वो 10 % यानि per मन्थ $ 400 सेव करता है . इस सबके बाद फाईनली अपनी गिल्ट फ्री स्पेंडिंग के लिए ब्रायन अपनी इनकम का 20 % यूज़ करता है।

यानि उसके पास per मंथ करीब $ 800 बचते है जिसे वो अपनी मर्जी से खर्च कर सकता है . लेकिन प्रॉब्लम ये है कि ब्रायन को हर महीने $ 800 गिल्ट फ्री शॉपिंग के लिए काफी नहीं लगते।

तो आप उसे क्या एडवाइज़ देना चाहोगे ? अब अगर हम ब्रायन को इन्वेस्टमेंट और सेविंग का पैसा कम करने को बोले तो ये एक बुरी एडवाईस होगी?

हाँ , बेशक ये एक अच्छा सोल्यूशन हो सकता है पर ब्रायन को बाद में पछताना पड़ेगा . हम यहाँ ब्रायन को अच्छी एडवाईज़ दे सकते है।

कि उसे अपना मन्थली फिक्स्ड कॉस्ट और गिल्ट फ्री स्पेंडिंग मनी ऑप्टीमाईज़ करने होंगे . ब्रायन के पास क्रेडिट कार्ड है।

तो काफी टाइम से वो अपने बिल्स टाइम पर पे करता आया है . तो उसके पास ये अच्छा रीजन है कि वो अपनी क्रेडिट कार्ड कंपनी से अपना एपीआर कम करने को बोल सकता है।

नेक्स्ट , ब्रायन को अपने सबस्क्रिपशन भी चेक करने चाहिए . उसे रिएलाईज़ हुआ कि उसने नेटफ्लिक्स अकाउंट लिया का subscription लिया है और स्टार wars वेबसाईट की भी मेंबरशिप ली है।

वो महीने में सिर्फ दो या तीन बार ही नेटफ्लिक्स देखता है . स्टार wars वेबसाईट के लिए भी उसने सिर्फ दो बार वेबसाईट विजिट की।

इसलिए ब्रायन को चाहिए कि वो इन दोनों की मेंबरशिप कैंसल करे जिससे वो $ 60 per मन्थ बचा सकता है . फिर ब्रायन ने अपनी रीसीट देखी।

उसे समझ नहीं आया कि वो इस महीने बाहर कितना खाना खा चुका है . घर में खाना बनने के बावजूद वो आये दिन फ़ास्ट फूड पर पैसा वेस्ट करता था और वो अक्सर बार वगैरह भी जाता रहता था।

ब्रायन ने जब सारी रीसीट चेक की तो हैरान रह गया कि उसने टोटल $ 600 बाहर खाने – पीने में उड़ा दिए थे . उसने खुद से वादा किया कि वो अब फ़ास्ट फूड और बार में ज्यादा खर्च नहीं करेगा।

ब्रायन अब जो खर्च करता है , सोच – समझकर करता है . इस तरह आने वाले महीनों में उसने करीब $ 266 बचा लिये थे।

ये पैसा उसने अपनी गिल्ट फ्री शॉपिंग में एड कर दिया . तो क्यों ना हम भी ब्रायन जैसा बनने की कोशिश करे।

उसे फालतू की शॉपिंग करने पर गिल्ट फील होता था और आये दिन बाहर खाना – पीना भी उसे एक तरह से फालतू खर्च ही लगता था।

इसलिए उसने अपने ये दोनों खर्चे कण्ट्रोल में किये . उसने उन चीजों के लिए पैसा सेव करना शुरू किया जो ज्यादा मैटर करती थी जैसे अच्छी किताबें और कपड़े वगैरह।

सोते समय भी पैसे बचाएं

कुछ लोग मनी मैनेजमेंट के एक्सपर्ट माने जाते है . ऐसे लोगों को शायद ही कभी फाईनेंशीयल मैटर हैंडल करने में परेशानी होती हो।

लेकिन क्या करे ? हर कोई तो मनी मैटर में एक्सपर्ट नहीं हो सकता . कुछ लोग तो इन मामलों में एकदम अनाड़ी होते है . उन्हें पता ही नहीं चलता कि उनका पैसा कहाँ और कब खर्च हो जाता है।

इनके लिए फाईनेंशीयल मैटर हैंडल करना स्ट्रेसफुल होता है जिससे इन्हें और फ्रस्ट्रेशन होने लगती है।

लेकिन रमित हमे एक ऐसा सिस्टम बता रहे है जो उन्होंने डेवलप किया है , जिसके श्रू फाईनेंशीयल मैटर हैंडल करना हमारे लिए बेहद ईज़ी हो सकता है।

क्या आप इस टर्म से वाकिफ है , डूईंग मोर बिफोर डूईंग लेस ? रमित का सिस्टम एक्जेक्ट इसी बारे में है . आपको इसे समझने के लिए कुछ घंटे लगेंगे।

लेकिन एक ऑटोमैटिक सिस्टम आपके आने वाले महीनों को और भी ईज़ी बना देगा . एक ऑटोमैटिक सिस्टम होने से सब कुछ ऑटोमैटिकली होने लगता है।

अगर आपने पहले से ही अपना कांशस स्पेंडिंग प्लान बना रखा है तो आपको बधाई हो ! आप आधा ऑटोमेटिक सिस्टम बना चुके हो।

अब जैसे मिशेल को ही ले लो . उसे बाकि लोगों की तरह ही मन्थली सैलरी मिलती है . जिस कंपनी के लिए वो काम करती है , उस कंपनी की तरफ से ऑटोमेटिकली उसकी सैलरी का 5 % कटकर उसके सेविंग अकाउंट यानि 401 ( के ) में सेव हो जाता है।

यानि हम कह सकते है कि उसकी कमाई का 5 % इन्वेस्टमेंट अकाउंट में जा रहा है . बाकि पैसा उसके चेकिंग अकाउंट में चला जाता है।

कुछ महीने पहले ही मिशेल ने अपना ऑनलाइन बैंक सेटिंग अरेंज किया था और अब उसकी सारी पेमेंट ऑटोमेटिक हो गई थी . उसके अकाउंट में से ऑटोमेटिकली 5 % सैलरी उसके रिटायरमेंट अकाउंट में चली जाती है।

ये 5 % आगे चलकर दो पार्ट में डिवाइड होते है : 7 % उसकी शादी के खर्चे के लिए और 4 % घर के डाउन पेमेंट के लिए . मिशेल अपने बिल्स और स्बसक्रिप्शन पे करने के लिए क्रेडिट कार्ड का ऑटोमेटिक पेमेंट यूज़ करती है।

जिसमे उसके इलेक्ट्रीसिटी बिल , नेटफ्लिक्स वगैरह शामिल है . कोई भी पेमेंट करने के फौरन बाद उसे क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट भी मिल जाता है जिससे मिशेल को अपने खर्चों का हिसाब – किताब रखने में आसानी होती है।

इसका एक फायदा ये भी है कि उसे पता चल जाता है कि कहीं वो अपने फिक्स्ड कॉस्ट में से ज्यादा खर्च तो नहीं कर रही . वैसे ज्यादातर मिशेल अपने खर्चे कण्ट्रोल में रखती है . वो इसलिए क्योंकि उसे अब अपने कांशस स्पेंडिंग प्लान की आदत पड़ चुकी है।

बिल्स और रिटायरमेंट अकाउंट में जमा करने के बाद जो बचता है वो मिशेल अपने बाकि खर्चों के लिए यूज़ करती है . उसे बाहर खाने और कपड़े खरीदने का शौक है तो वो अपने शौक भी पूरे कर लेती है।

लेकिन वो जितना हो सके उतना लिमिट से चलती है . जरूरी चीजों के अलावा फालतू कुछ नहीं लेती जैसे महंगे जूते वगैरह और जहाँ पैदल जा सकती है वहां वो कैब के पैसे बचाती है।

ऑटोमेटिक मनी फ्लो के लिए अपने सारे अकाउन्ट को साथ में लिंक कर दो . हर चेकिंग के लिए एक चार्ट बनाओ , सेविंग , क्रेडिट कार्ड और इन्वेस्टमेंट जो भी आपके पास है।

इससे आपको हर सिंगल परचेज का हिसाब रखने में आसानी होगी . अपने चेकिंग एकाउंट को अपने क्रेडिट कार्ड अकाउंट से लिंक कर दो।

ऑटोमेटिक ट्रांसफर सेट कर दो ताकि जब आपको जरूरत पड़े , आप अपने बिल्स पे कर सके . साथ ही अपने चेकिंग अकाउंट को भी सेविंग अकाउंट से लिंक कर दो . ज़ाहिर है आपकी सैलरी का 5 % वही सेव होगा जिसके लिए आप सेव करना चाहते हो।

निष्कर्ष

सबसे पहले तो आपने जो चीज़ सीखी , वो है अपना क्रेडिट कार्ड ऑप्टीमाईज़ करना।

एक गुड क्रेडिट स्कोर से लेंडर्स के लिए ईज़ी हो जाता है कि वो आपके ऊपर ट्रस्ट कर सके और जब ट्रस्ट करेंगे तभी पैसा उधार दे पाएंगे।

अपना क्रेडिट कार्ड ऑप्टीमाईज़ करने के दो तरीके है जो आप अप्लाई कर सकते हो।

पहला तो ये कि कंपनी को कुछ ख़ास फीस के बारे में पूछो जैसे कि annual फी . ये छोटी – छोटी फीस आपको बाद में काफी भारी पडती है।

दूसरा , लोअर एनुअल परसेंटेज़ रेट के लिए नेगोशीएट करना सीखो। आपने ऑनलाइन बैंक्स के बारे में पढ़ा . अपने कस्टमर्स बढ़ाने के लिए ये हायर इंटरेस्ट रेट ऑफर करते है।

ख़ासकर बात अगर सेविंग एकाउंट की हो तो अमाउंट चेक करने के लिए आप एक अकाउंट किसी फिजिकल बैंक में खोल सकते हो लेकिन हमेशा ऐसा बैंक चूज़ करना जिसके इंटरेस्ट रेट हाई हो।

तीसरा , आपने कांशस स्पेंडिंग प्लान के बारे में पढ़ा . इस प्लान के चार फैक्टर है : मन्थली फिक्स्ड कॉस्ट , इन्वेस्टमेंट , सेविंग्स और गिल्ट फ्री स्पेंडिंग . फिक्स्ड कॉस्ट आपकी सैलरी का करीब 60 % लेती है।

इन्वेस्टमेंट के लिए आपकी इनकम में से 5-10 % सेविंग्स में जाना चाहिए . फिर इसके बाद जो पैसा बचेगा वो आपका गिल्ट फ्री स्पेंडिंग मनी है . ये जानना कि आपके लिए क्या इम्पोर्टेट है , आपको गिल्ट फ्री होकर शॉपिंग करने की फ्रीडम देता है . इसलिए सोच – समझ कर वही खरीदो जो आपके लिए बेहद जरूरी हो।

चौथा , आपने ऑटोमैटिक मनी ट्रान्सफर की खूबसूरती के बारे में पढ़ा . ये सुनने में ईज़ी लगता है पर लोग शायद ही ये करते होंगे।

जितने भी मनी रिलेटेड अकाउंट आपके पास है , उनकी सेटिंग अरंज कर ले . अपने चेकिंग अकाउंट को अपने सेविंग अकाउंट से लिंक करो . साथ ही अपने चेकिंग अकाउंट को अपने क्रेडिट कार्ड से भी लिंक कर लो।

इस तरह आपको अपने कांशस स्पेंडिंग प्लान को फॉलो करने की टेंशन नहीं रहेगी . अगर आप इसे अभी सेट कर लेते हो तो आपका अकाउंट खुद ही आपका पैसा डिवाइड कर लेगा।

मनी हैंडल करना कई लोगों के लिए बड़ा सिरदर्द का काम है पर आपके लिए नहीं होगा अगर आप इस समरी में दिए गए टिप्स फॉलो करेंगे।

तो वो दिन गए जब आपको लगता था कि पैसा आपके हाथ में टिकता ही नहीं है , अब आप ना सिर्फ पैसे बचा पायेंगे बल्कि धीरे – धीरे अमीर भी हो सकेंगे।

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