Kaidi Book Summary In Hindi|Munshi Premchand|क़ैदी सारांश हिंदी में

       Kaidi By Munshi Premchand

Kaidi Book Summary In Hindi|Munshi Premchand|क़ैदी सारांश हिंदी में


चौदह साल तक लगातार मानसिक और शारीरिक तकलीफ भोगने के बाद आइवन ओखोटस्क जेल से बाहर निकला ; पर उस परिंदे की तरह नहीं , जो शिकारी के पिंजरे से पर कटाकर निकला हो बल्कि उस शेर की तरह जिसे पिन्जरे की दीवारों ने और भी ज्यादा खूख्वार और खून का प्यासा बना दिया हो ।

उसके दिल में एक आग लगी थी जिसकी लपटों ने उसके ताकतवर और लोहे से मजबूत जिस्म को और दिल के जज्बातों को जला कर राख कर डाला था और आज उसके एक – एक नस में चिंगारी भरी हुई थी . वो भूख से बेहाल हुआ जा रहा था . बगावत का तूफ़ान उसके चेहरे से झलक रहा था . जेलर ने उसका वज़न तौला . जेल में आते वक्त हट्टा कट्टा था , आज कमज़ोर होकर बाहर निकला था । जेलर ने हमदर्दी दिखाते हुए उससे कहा ” तुम बहुत कमज़ोर हो गये हो , आइवन ।अगर जरा भी बीमार पड़े तो बुरा होगा।


आइवन ने अपने हड्डियों के ढॉचे जैसे जिस्म को बड़े नाज़ से देखा और खुद के अंदर एक ज़लज़ला सा महसूस करते हुए जवाब दिया ” क़ौन कहता है कि मैं कमज़ोर हो गया ‘ तुम खुद देख रहे होगे ” जेलर बोला । ‘ दिल की आग जब तक नहीं बुझेगी , आइवन नहीं मरेगा , मि . जेलर , सौ साल तक भी नहीं , यकीन रखिए ” आइवन ने जवाब दिया ।

आइवन ऐसी ही बहकी – बहकी सी बातें किया करता था , इसलिए जेलर ने उसे ज्यादा भाव नही दिया । वैसे भी सबको लगता था कि वो आधा पागल है । कुछ लिखा – पढ़ी के बाद उसके कपड़े और किताबे मँगवा कर उसे दे दिए गए । पर उसके पहले के सूट अब किसी और के लगते थे । कोटों की जेबों से कई सारे रुपए निकले , कई नगद रूबेल । उसने सबकुछ वहीं जेल के वार्डरों और साफ़ – सफाई करने वालो मुलाज़िमों को दे दिया । ऐसा लग रहा था जैसे उसे कोई राज मिल गया हो और उसे अब इन चीजों की जरूरत ही नहीं है ।

जेलर ने कहा , ‘ यह नहीं हो सकता , आइवन ! तुम सरकारी मुलाज़िमों को घूस नहीं दे सकते । ‘ आइवन बच्चो की तरह मासूमियत से हसंते हुए बोला ” यह घूस नहीं है , मि . जेलर ! घूस देकर अब मुझे इनसे क्या फायदा होगा ? नाराज़ होकर अब ये मेरा क्या बिगाड़ लेंगे और खुश होकर मुझे क्या दे देंगे ? ये कोई घूस नहीं बल्कि इनकी रहमदिली का ईनाम है जिसकी वजह से मेरा यहाँ चौदह साल तो क्या चौदह घंटे रहना भी मुश्किल हो जाता ।

जब वह जेल के दरवाजे से बाहर निकला तो जेलर और बाकि मुलाज़िम उसे गाड़ी तक पहुँचाने आए । कोई पन्द्रह साल पहले की बात है । आइवन मास्को के एक बेहद अमीर और खानदानी घर का लाड़ला बेटा था । उसने स्कूल में ऊँची तालीम पायी थी साथ ही वो खेल – कूद में भी काफी माहिर था । वो एक नर्मदिल , बेखौफ और खुशमिजाज़ नौजवान था । दिल शीशे सा साफ़ था , किसी कमज़ोर पर जुल्म होते नहीं देख सकता था और बहादुर इतना कि बड़े से बड़े तूफान का सामना कर जाए ।

उसके साथ हेलेन नाम की एक लड़की पढ़ती थी , जिस पर स्कूल के के सारे लड़के जान देते थे । वह जितनी हसीन थी , उतनी ही तेज़ – तर्रार भी . अपने ही ख्यालो में खोई रहती थी पर अपने ज़ज्बात दिल की गहराईयों में छुपा कर रखती थी । कहना मुश्किल था कि उसे आइवन में ऐसा क्या नजर आया जो वो उस पर दिलो – जान से फ़िदा हो गई । दोनों में ज़मीन – आसमान का फर्क था । आइवन घूमने – फिरने वाला और शराब का शौकीन था तो हेलेन शेरो – शायरी और नाच – गाने पर जान देती थी ।

आइवन की नज़रो में पैसा सिर्फ और सिर्फ दोनों हाथो से उड़ाने वाली चीज़ थी जबकि हेलेन अव्वल दर्जे की कंजूस थी । आइवन के लिए स्कूल का लेक्चर – हॉल किसी जेल से कम नहीं था और हेलेन इसी समुंद की मछली थी । उन दोनों की फितरत में जमीन – आसमान का फर्क था और यही फर्क उन्हें एक दुसरे के करीब खींच लाया था जो आखिरकार उनकी मोहब्बत का सबब बन गई ।

जब आइवन ने हेलेन से अपने प्यार का इज़हार करते हुए उससे शादी करने की मर्जी ज़ाहिर की तो हेलेन भी मना नही कर सकी . दोनों किसी शुभ घड़ी में शादी करके सुहागरात मनाने के लिए किसी सुंदर सी पहाड़ी जगह पर जाना चाहते थे . अभी उनके ख्वाब पूरे भी नहीं हुए थे कि अचानक सियासी उठा – पटक ने उनकी जिंदगी को अपनी लपेट में ले लिया ।

हेलेन पहले से ही वतनपरस्त थी , उसकी देखा – देखी आइवन भी उसके रंग में रंग गया । वो रईस खानदानी लड़का था और उसके लिए आम लोगो का साथ देना काफी मुश्किल फैसला था । वो जब कभी इस कशमकश में उलझ कर मायूस होता तो हेलेन उसे हौंसला बंधाती थी और आइवन उसकी बेपनाह मोहब्बत और जूनून देखकर अपनी कमजोरी पर शर्मिंदा हो उठता ।

इसी दौरान उक्रायेन ईलाके में एक बड़ा ही ज़ालिम और बेरहम गवर्नर मुकर्रर हुआ था जिसका नाम था रोमनाफ । रोमनाफ वतनपरस्तों का कट्टर दुश्मन था । दिन में जब तक दो – चार बागीयों को जेल ना भेज दे , उसे चैन नही आता था । आते ही उसने कई प्रेस के सम्पादकों पर सरकार के खिलाफ बगावत का ईल्ज़ाम लगाकर उन्हें साइबेरिया की जेल में डलवा दिया था । कई किसान सभाएँ तोड़ दीं , शहर की म्युनिसिपैलिटी तोड़ दी और जब आम जनता इस मनमानी के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाने के लिए एकजुट हुई तो उसने पुलिस को भीड़ पर गोलियाँ चलाने का हुक्म दे दिया जिसमे कई बेगुनाह और मासूम लोग मारे गए । ईलाके में मार्शल लॉ लगा दिया गया ।

सारे शहर में अफरा – तफरी का माहौल फैला हुआ था । पुलिस की तलाशी जारी थी , लोगो को जबरन धमकाया जा रहा था और उनसे मारपीट की जा रही थी । डर के मारे लोग घरो में बंद हो गए थे । ऐसे मौके पर हेलेन ने बड़े सख्त तेवर में कहा ” ये तो सरासर जुल्म है , ये नाइंसाफी अब देखी नही जाती । आइवन , कोई तो रास्ता होगा इस जुल्मो – सितम से बचने का ” आइवन ने सवालिया नजरो से उसकी तरफ देखा ” हम कर ही क्या सकते हैं ? हेलेन उसकी खामोशी पर चिढ़ कर बोली ” तुम कहते हो , हम क्या कर सकते हैं ? मैं कहती हूँ , हम सबकुछ कर सकते हैं । मैं इन्ही हाथो से उसे खत्म कर दूंगी “

आइवन ने उसे हैरानी से देखा ” तुम्हे क्या लगता है ? उसे कत्ल करना आसान है ? वह कभी खुली गाड़ी में नहीं निकलता । उसके आगे – पीछे हमेशा उसके सौ रखवाले रहते है । रेलगाड़ी में भी वह रिजर्व डब्बों में सफर करता है ! मुझे तो ये नामुमकिन लगता है हेलेन , बिल्कुल नामुमकिन ” हेलेन चुपचाप चाय बनाने लगी । फिर दो प्याले मेज पर रखकर उसने प्याला मुँह से लगाया और धीरे – धीरे पीने लगी । वो कहीं गहरे ख्यालों में गुम थी |

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अचानक उसने चाय की प्याली मेज पर रख दी । उसकी बड़ी – बड़ी आँखों में एक चिंगारी नजर आ रही थी । उसने आईवन की तरफ देखते हुए कहा ‘ इस सब के बावजूद मैं उसे कत्ल कर सकती हूँ , आइव ! आदमी अगर चाहे तो अपनी जान पर खेलकर सबकुछ कर सकता है । जानते हो मैं क्या करूँगी ? मैं उसे अपने हुस्न के जाल में फंसाऊँगी , उसका यकीन हासिल करूँगी , उसे इस धोखे में रखूगी कि मुझे उससे मोहब्बत हो गई है ।

इंसान चाहे कितना भी पत्थरदिल हो , मोहब्बत की चिंगारी उसके दिल में कहीं ना कहीं छुपी रहती है । बल्कि मुझे तो लगता है कि रोमनाफ का ये जुल्मो – सितम उसके दिल की अधूरी ख्वाहिशों का ही अंजाम है और कुछ नहीं ।

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हो सकता है कि किसी हसीना ने उससे बेवफाई की हो और उसका दिल तोडा हो और मोहब्बत में धोखा खाकर उसके दिल में बेइंतहा नफरत पैदा हो गई हो । मै उसके टूटे दिल को जोड़कर उसमे मोहब्बत के फूल खिला दूँगी । जो बाहर से सख्त दिखते होते है , अंदर से खोखले होते है ।

मेरी एक मुस्कुराहट पर वो दिलो – जान से फ़िदा हो जायेगा ! मुझे यकीन है मै उसे अपने प्यार के जाल में फंसा के अपने ईशारों पर नचा लूंगी । हाँ तुम्हारे जैसे आज़ाद परिंदा फंसाना थोडा मुश्किल है । अगर तुम मानते हो कि मै बदसूरत नहीं हूँ तो मै तुम्हे यकीन दिलाती हूँ कि मुझे अपने मकसद में कामयाबी जरूर मिलेगी ।

तो बताओ मै हसीन हूँ या नहीं ? हेलेन ने आइवन को तिरछी नजरो से देखते हुए पुछा । आइवन उसकी इस अदा पे सौ जान से निसार होता हुआ बोला ” तुम मुझसे पूछ रही हो हेलेन , मेरी नजरो में तो तुम इस दुनिया की … ‘ वो बात पूरी करता इससे पहले ही हेलेन उसकी बात काटते हुए बोली अगर तुम्हे ऐसा लगता है , तो तुम बेवकूफ हो आइवन !

इस शहर में नहीं बल्कि हमारे स्कूल में ही मुझसे कहीं ज्यादा खूबसूरत लड़कियां है । हाँ , तुम तो यही बोलोगे कि मै बदसूरत नहीं हूँ । तो क्या तुम्हे ये लगता है कि मै तुम्हे दुनिया का सबसे खूबसूरत मर्द समझती हूँ ? कभी नहीं । मैं ऐसे एक नहीं सौ नाम गिना सकती हूँ जो शक्ल सूरत में तुमसे बढ़कर हैं , पर जो बात तुममें है वो किसी और में नही ।

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तो अब तुम मेरा इरादा सुनो । मुझे उसके करीब आने में कोई एक महीना तो लग ही जायेगा फिर वो मेरे फिर घूमने – फिरने लगेगा और फिर एक दिन मै रात में उसके साथ तालाब के किनारे वाले बगीचे में घूमने निकलूंगी । हम एक बेंच पर बैठ होंगे ,उसी वक्त तुम रिवाल्वर लेकर आओगे और उसका काम तमाम कर दोगे ” जैसा कि हमने पहले ही जिक्र किया था कि आइवन एक बड़े घर का बेटा था।

उसे इस खून – खराबे से भरी बगावत की बातो से कोई मतलब नहीं था । हेलेन की मोहब्बत में पड़कर उसे वतनपरस्तीयों से थोड़ी हमदर्दी हो गयी थी मगर हमदर्दी इंसान को कभी भी मुसीबत में नहीं डालती । उसने खुलकर हेलेन की बातो से इंकार तो नहीं किया पर उसकी बातो से वो इत्तेफाक भी नही रखता था ।

शक जताते हुए उसने हेलेन से पूछा ” ये तो सोचो हेलेन कि इस तरह किसी का कत्ल कर देना क्या इंसानियत है ? ‘ हेलेन ने एकदम पलटकर जवाब दिया ” जो दूसरों के साथ इंसानियत नहीं दिखता , उसके साथ हम क्यों इंसानियत का बर्ताव करे ?

इस हैवान ने ना जाने कितने घर तबाह हो चुके है और ना जाने कितने और होंगे ? ना जाने इसने कितने बेगुनाहों की जान ली होगी ? ऐसे शैतान के साथ हमदर्दी करना सरासर गलत होगा । मुझे समझ नहीं आता तुम इतने ठंडे क्यों हो । मेरा तो उस हैवान को देखते ही खून खौलने लगता है । जिस वक्त उसकी सवारी निकलती है तो कसम से मेरी बोटी – बोटी इंतकाम की आग में सुलग उठती है ।

ऐसे दरिंदे की तो अगर कोई जीते – जी खाल भी खींच ले तो भी मुझे फर्क नही पड़ेगा । कह दो अगर तुम बुजदिल हो तो मैं खुद ही निपट लूंगी । तुम देखना मै कैसे उसे जहन्नुम पहुंचाती हूँ । और कहते – कहते हेलेन का हसीन चेहरा गुस्से से लाल हो गया ।

आइवन शर्मिंदगी से बोला ” नहीं- , ये बात नहीं है , हेलेन ! मेरा ये मतलब नहीं था कि मै इस काम में तुम्हारी मदद नहीं करूंगा । मुझे आज पता चला कि तुम मुल्क की बेहाली पर कितनी परेशान और बैचेन हो पर एक बार फिर से सोच लो ! ये काम आसान नहीं है , इसमें काफी खतरा हो सकता है । हेलेन ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा ” तुम फ़िक्र मत करो आइवन ! जो चीज़ मुझे इस दुनिया में सबसे प्यारी है , उसे दांव पर लगाते हुए क्या मै एहतियात नहीं बरतूंगी ? पर तुमसे एक गुजारिश करती हूँ।

अगर इस बीच में कुछ ऐसा करूं जो तुम्हे अच्छा ना लगे तो तुम मुझे माफ़ करोगे ना ? आइवन ने फिर सवालियां नजरो से हेलेन को देखा । वो क्या कहना चाहती थी , वो समझा नहीं । हेलेन थोडा डर गई , कहीं आइवन कोई नयी आफत तो नहीं खड़ा करेगा ।

उसे तस्सली देने के लिए वो अपना चेहरा उसके होंठो के पास लाकर बोली ” प्यार का नाटक करते – करते शायद मुझे वो भी करना पड़ जाए जिस पर सिर्फ तुम्हारा हक है । डरती हूँ कि कहीं तुम शक ना करने लगो ” आइवन ने उसे कसकर बांहों में भींच लिया और बोला ” ये नामुमकिन है , भरोसा ही प्यार की पहली शर्त है ” आखिर शब्द कहते हुए उसकी आँखे झुक आई ।

उसने बोलने को तो बोल दिया था पर उसका दिल इस बात को कुबूल करेगा या नहीं , इस पर उसे शक था । इसके तीन दिन बाद इस नाटक का आग़ाज़ हुआ । हेलेन रोमनाफ के पास ये झूठी फ़रियाद लेकर गई कि पुलिस उस उसे किसी मामले फंसा रही है और उसने रोमनाफ को ये भी यकीन दिला दिया कि पुलिस उसे सिर्फ इसलिए तंग कर रही है क्योंकि वो उनकी अश्लील शर्ते मानने को तैयार नहीं है ।

उसने रोमनाफ के सामने झूठमूठ कुबूल किया कि वो स्कूल के दिनों में उसकी दोस्ती कुछ ऐसे लड़को से हो गई थी जो सरकार के खिलाफ थे , पर स्कूल छोड़ने के बाद से उसका किसी से कोई मतलब नहीं है । रोमनाफ उतना चालाक नही था जितना कि वो खुद को समझता था ।

दस साल की अफसरी में आज तक उसका सामना ऐसी हसीना से नहीं हुआ तो जो उसका यकीन हासिल करने के बाद खुद को उसके रहमो – करम पर छोड़ दे । हुस्न के इस खज़ाने ने उसे लालच में अँधा कर दिया था । उसे लगा कि उसने हेलेन से उन बागी लड़को के बारे में सबकुछ उगलवा कर बड़ी चालाकी का काम किया है पर उसके ख़ुफ़िया पुलिसवालो के लाख सिर पटकने के बाद भी उन्हें ऐसे कोई लड़के नहीं मिले थे । रोमनाफ हेलेन की बातो का झूठ पकड़ने में एकदम नाकाम रहा ।

हेलेन ने उस पर अपने हुस्न का जादू चलाने में आधा घंटा भी नहीं लगा था । हेलेन जाने को हुई तो रोमनाफ अपनी कुर्सी से उठकर बोला ” मुझे उम्मीद है कि ये मुलाक़ात आखिरी नहीं होगी ” हेलेन ने उसकी तरफ हाथ बढ़ाते हुए जवाब दिया ” हुजूर ने इस गरीब पर जो मेहबानी की है , उसके लिए हुजूर का बहुत – बहुत शुक्रिया . मेरी खुशनसीबी होगी अगर आप कल तीन बजे मेरे यहाँ चाय पे आए ” और फिर हेलेन ने बड़ी अदा से उसके सामने झुककर सलाम किया और चली आई ।

रोमनाफ उसे हसरत भरी निगाहों से जाते हुए देखता रहा । इश्क का बुखार उस पर चढ़ चूका था । हेलेन रोज़ रोमनाफ से मिलती और आकर सारी बातें आइवन को सुनाती । ‘ रोमनाफ असल में जितना बदनाम है , उतना बुरा नहीं । वो तो बड़ा ही खुशमिजाज़ है , संगीत और कला का प्रेमी है और तमीज़ और तहजीब वाला इंसान है ” थोड़े ही वक्त में हेलेन और रोमनाफ एक दुसरे के करीब आ गए थे।

फिर एकाएक शहर में पुलिस की ज्यादतियाँ में भी कमी आने लगी । और एक दिन आखिरकार वो दिन भी आ ही गया जिसका लंबे वक्त से इंतज़ार था। आइवन और हेलेन दिन – भर बैठकर इसी मसले पर बाते करते रहे । आइवन का दिल आज बड़ा बैचेन था । कभी वो बिना बात हंसने लगता तो कभी यूं ही रोने लगता ।

शक , इंतज़ार और एक अनजान डर ने उसके दिल में एक हलचल मचा रखी थी । वो उस मुसाफिर की तरह था जो सफर पर तो निकल पड़ा था पर जिसे ना अपनी मंजिल का पता था और ना ही रास्ते का । खुद हेलेन का दिल भी डांवाडोल हो रहा था । वो आज बड़ी गुमसुम थी । आज ही वो दिन था जब उन्हें इरादों को हकीकत में बदलना था और इसके लिए उसने पूरी तैयारी भी कर रखी थी ।

साजो – श्रृंगार का सारा सामान मौजूद था , खूबसूरत लिबास था , गहने थे , ईत्र और फूल थे , वो किसी चीज़ की कमी नहीं रखना चाहती थी पर इस तैयारी एक सिपाही के जैसा जोश कम था, बल्कि एक बुजदिल जैसी घबराहट ज्यादा थी । एकाएक आइवन की आँखे भर आई उसने हेलेने का चेहरा अपनी तरफ घुमाते हुए कहा ” आज तुम बड़ी दिलफरेब लग रही हो हेलेन मगर मुझे ना जाने क्यों तुमसे डर लग रहा है।

” हेलेन मुस्कुराई , उसकी मुस्कुराहट में एक तड़फ थी ” इंसान को फ़र्ज़ की खातिर दिल पे पत्थर भी रखना पड़ता है आइवन , आइवन । देखो ना आज मै अमृत की शक्ल में ज़हर बनी हूँ , हुस्न का ऐसा इस्तेमाल तुमने कहीं और देखा है ? ‘ आइवन ने बुझे हुए मन से कहा , ‘ क्या इसी को वतनपरस्ती कहते हैं । ‘ ‘ यह वतनपरस्ती है ? यह जहन्नुम है । ‘ ‘ मगर दुनिया में अभी कुछ दिन और इसकी जरूरत पड़ेगी । ‘ यह हालात जितनी जल्दी बदले , उतना अच्छा ।

पाँसा पलट चुका था । आइवन की रगों का लहू उबाल मार रहा था , वो गुस्से से दांत पीसता हुआ बोला ” इन जुल्मियों को दुनिया में फलने – फूलने दिया जाए ताकि इनके गुनाहों के काँटों से जमीन पर कहीं पाँव रखने की जगह ही ना बचे “

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हेलेन इस बात के जवाब चुप रही पर उसके दिल का दर्द साफ – साफ उसके चेहरे पर झलक रहा था । उसे अपने वतन से बड़ी मोहब्बत थी , इतनी कि उसके सामने इन्सान की कोई हैसियत नही थी । पर इस वक्त उसके दिल में जो कमजोरी आ रही थी उसे ज़ाहिर करने की उसमे ज़रा भी हिम्मत नही थी । आखिरकार दोनों ने गले लगकर एक दुसरे को अलविदा कहा ।

कौन जाने ये आखिरी मुलाक़ात हो ? दोनों के दिल गमगीन थे और आँखे नम । आइवन ने उसका जोश बढाते हुए कहा ‘ मैं सही वक्त पर पहुँच जाऊँगा । हेलेन ने कोई जवाब नहीं दिया । आइवन फिर से नर्म लहजे में बोला ” खुदा से मेरे लिए दुआ करना , हेलेन ! ‘ हेलेन ने रुंधे हुए गले से कहा , ‘ मुझे खुदा पर यकीन नहीं है । ‘ ‘ पर मुझे तो है ! ‘ आइवन बोला ‘ कब से ? ‘ हेलेन ने पुछा ‘ जब से मौत मेरी आँखों के सामने खड़ी है ” आइवन बोला और ये कहकर वो तेज़ी से निकल गया ।

शाम हो चुकी थी । मुश्किल इम्तहान में सिर्फ दो ही घंटे बचे थे , डर के मारे आइवन की जान सूख रही थी । वह कहीं अकेले में बैठकर सोचना चाहता था । उसे एहसास हुआ जैसे वो आज़ाद नहीं है बल्कि एक बड़ी मोटी सी जंजीर में बुरी तरह जकड़ा हुआ है । पर वो इस जंजीर को तोड़े कैसे ? रात दस बज चुके थे । हेलेन और रोमनाफ बगीचे में फूलों की झाड़ी के नीचे बेंच पर बैठे हुए थे ।

सर्द हवा चल रही थी । चाँद कहीं बादलो में छुपा था , जैसे दिल में छुपी कोई उम्मीद हो । हेलेन शक भरी नजरो से आस – पास देखती हुई बोली , ‘ काफी देर हो चुकी है , अब यहाँ से चलना चाहिए । ‘ रोमनाफ ने बेंच पर पाँव फैलाते हुए कहा , ‘ कोई ज्यादा देर नही हुई , हेलेन ! मै नहीं जानता कि मेरी जिंदगी के | पल एक हसीन ख्वाब है या हकीकत ? पर अगर सच है।

तो किसी ख्वाब से भी ज्यादा दिलकश है और अगर हकीकत है तो भी ख्वाब से ज्यादा मीठे और सुनहरे ” हेलेन बेचैन होकर उठ खड़ी हुई और रोमनाफ का हाथ पकड़कर बोली , ‘ मेरा दिल घबरा रहा है और चक्कर भी आ रहे है । चलो मुझे मेरे घर पहुंचा दो । ‘ रोमनाफ ने उसका हाथ खींचकर उसे अपने करीब लाते हुए कहा ‘ लेकिन मैंने गाड़ी तो ग्यारह बजे बुलायी है !

हेलेन के मुँह से चीख निकल गयी ” क्या ग्यारह बजे ! ‘ हाँ , अब ग्यारह बजने वाले है हैं । आओ , तब तक और कुछ और बातें कर लेते है । आज की रात तो काली बला सी लग रही है , इसे जितनी देर दूर रख सकूँ उतना अच्छा । जानती हो हेलेन उस दिन तुम मेरी किस्मत की देवी बनकर आई थी वर्ना तो अब तक मैंने कितने और जुल्म किये होते ।

इस रहमदिली से हालात में जो बदलाव आये है , मै खुद हैरान हूँ | कई महीनों के जुल्मो सितम से भी जो नहीं मिला था वो कुछ ही दिनों की तस्सली से हासिल हो गया । मै एहसानमंद रहूँगा हेलेन , सिर्फ इस बात का अफ़सोस है कि सरकार ईलाज करना नहीं जानती , सिर्फ जुल्म करना जानती है ।

जार के मंत्रियों को भी अब मुझ पर कुछ शक हो चला है । शायद वो लोग मुझे यहाँ से हटाने की फिराक में लगे है ” रोमनाफ अपनी बात पूरी करता इससे पहले ही टॉर्च की रौशनी से उनकी आँखे चुधियाँ गई और रिवाल्वर की गोली चलने का धमाका हुआ । रोमनाफ ने उछलकर आइवन को पकड़ा और जोर -जोर से चिल्लाने लगा “ पकड़ो , पकड़ो ! खून ! हेलेन , तुम यहाँ से भागो ।

पार्क में कई सारे पहरेदार मौजूद थे । सब के सब दौड़ते हुए आ गए और आइवन को घेर लिया । पलभर में ही ना जाने कहाँ से शहर की पुलिस , हथियारबंद पुलिस , ख़ुफ़िया पुलिस और घुड़सवार पुलिस के जत्थे – के – जत्थे आ पहुँचे । आइवन को गिरफ्तार कर लिया गया । रोमनाफ ने हेलेन से हाथ मिलाते हुए अपना शक ज़ाहिर किया ‘ यह आइवन तो वही लकड़ा है ना जो तुम्हारे साथ स्कूल में पढ़ता था ।

हेलेन ने नाराजगी जाहिर की , ‘ हाँ , है । लेकिन मुझे जरा भी अंदाजा नही था कि ये बागी बन चूका है ” ‘ गोली मेरे सिर के ऊपर से निकल गयी । ‘ ‘ या खुदा ! ‘ ‘ मैंने दूसरा फ़ायर करने का मौका ही नहीं दिया ।

मुझे इस लड़के की हालत पर बेहद अफ़सोस हो रहा है हेलेन ! ये बदकिस्मत समझते हैं कि हमे कत्ल करके ये वतनपरस्ती निभा रहे है ” पर सोचो ज़रा मेरे मरने के बाद कोई और मुझसे बुरा अफसर नहीं आ सकता ? मगर मुझे इस लड़के पर जरा भी गुस्सा नही आता ।

हेलेन तुम जरा भी फ़िक्र मत करो । चलो , मैं तुम्हें घर पहुँचा दूं । ‘ रोमनाफ पूरे रास्ते इस हमले में बाल – बाल बच जाने पर खुद को ही मुबारकबाद देता रहा और ऊपरवाले का लाख – लाख शुक्रिया अदा करता रहा मगर हेलेन अपने ख्यालो में कहीं डूबी हुई थी । दूसरे दिन मजिस्ट्रेट के इजलास में मुकदमा चला और हेलेन सरकारी गवाह थी ।

आइवन को लगा जैसे कि ये दुनिया एक गहरा कुआं हो और वो उसकी गहराईयो में डूबता चला जा रहा है । इस घटना को चौदह साल के बीत चुके थे । आइवन रेलगाड़ी से उतरकर हेलेन के पास जा रहा है । उसे नहीं मालूम कि उसके जेल जाने के बाद उसके घरवालो का क्या हुआ । उसे इस बात की ज़रा भी फ़िक्र नही थी कि उसके माँ – बाप उसकी जुदाई में बेहाल थे ।

वो एक वहशी की तरह इन चौदह सालो से दिल में नफरत की आग पाले हेलेन के पास जा रहा है ; पर उसकी नफरत खून की प्यासी नहीं है । इन चौदह सालों में उसने जो तकलीफे झेली थी , उस दर्द और तड़प को वो कुछ अल्फाजो की शक्ल में ज़हर की तरह हेलेन की रगों में भरकर उसे भी तड़पते हुए देखना चाहता था ताकि उसके कलेजे को ठंडक मिल सके ।

और वो अलफ़ाज़ क्या थे ? वो हेलेन से कहेगा ” ‘ हेलेन , तुमने मेरे साथ जो दगा किया है त्रिया – चरित्र के इतिहास में ऐसा दगा किसी ने नहीं किया होगा । मैंने अपना सबकुछ तुम्हारे कदमो पर रख दिया था , मैं तुम्हारे इशारों का गुलाम था । वो तुम ही थी जिसने मुझे रोमनाफ के क़त्ल के लिए उकसाया था और तुमने ही मेरे खिलाफ गवाही दे दी ।

क्यों किया तुमने ऐसा ? सिर्फ अपनी हवस पूरी करने के लिए ? मेरे खिलाफ और कोई गवाह नही था । रोमनाफ और उसकी ख़ुफ़िया पुलिस भी झूठी शहादतों से मुझे हरा नहीं सकती थी ; मगर तुमने मुझे सिर्फ इसलिए फंसाया ताकि तुम रोमनाफ के साथ अपनी हवस मिटा सको , उसकी बांहों में रहने के लिए तुमने मुझे धोखा दिया ।

पर मै लौट आया हूँ हेलेन , गौर से देख लो मुझे ! मै वही आइवन हूँ जिसे तुमने अपने पैरो तले कुचल कर रख दिया था , आज वही आइवन तुम्हारी असलियत से नकाब उठाने आया है । तुमने तो वतनपरस्ती की कसमे खाई थी , खुद को देश के नाम कुर्बान कर देना चाहती थी पर हुआ क्या ? अपने लालच में अंधी होकर तुम सब कुछ भूल गई और अमीरी और हक़ के पहले ही निवाले पर दुम हिलाती हुई टूट पड़ी , लानत है तुम्हारी इस बदसूरत जिंदगी पर , लानत है तुम्हारे इस ऐशो – आराम पर ।

शाम गहरा रही थी । पश्चिम के आसमान सूरज डूब चूका था । रोमनाफ की बड़ी सी हवेली से हेलेन का जनाज़ा ले जाने की तैयारियाँ हो रही थीं । शहर के सारे बड़े लोग और नेता शोक जताने आये थे । जनाजे को फूलो के हार से सजाते हुए रोमनाफ काँप रहे थे , आँसूओं से उसकी आँखे भीगी हुई थी ।

ठीक उसी वक्त आइवन किसी वहशी की तरह वहां पहुंचा कमज़ोर , कंधे झुके हुए , सिर के बाल बढ़ाये , किसी कंकाल की तरह आकर खड़ा हुआ । उस पर किसी का ध्यान नही गया । सबको लगा शायद कोई भिखारी आया है जो ऐसे मौको पर कुछ पाने की उम्मीद लिए चले आते है ।

शहर के बिशप ने जब अन्तिम संस्कार की सारी रस्मे पूरी कर दी और मरियम की बेटियाँ नये जीवन के स्वागत पर गीत गा चुकीं , तो आइवन जनाजे के पास जाकर कांपती हुई जुबान से बोला ‘ ये वो बदजात है , जिसे सारी दुनिया की पवित्र आत्माओं की शुभ कामनाएँ भी नरक की आग में जलने से नहीं बचा सकतीं ।

वो इस लायक थी कि इसकी लाश को भी … ‘ वो आगे कुछ और कहता इससे पहले कुछ लोगो ने दौड़कर उसे पकड़ लिया और धक्के मारते हुए महल के गेट की तरफ ले जाने लगे । उसी वक्त रोमनाफ आकर उसके कन्धों पर हाथ रखा और उसे एक तरफ ले जाकर पूछा , ‘ दोस्त , क्या तुम्हारा नाम क्लॉडियस  आइवनाफ है ?

हाँ , तुम वही हो , मुझे तुम्हारी शक्ल याद है । मुझे सब मालूम है , एक – एक बात मालूम है । हेलेन ने मुझसे कुछ भी नहीं छुपाया था । अब वह इस दुनिया में नहीं है तो मै झूठ बोलकर उसकी कोई सेवा नहीं कर सकता । तुम उसे लानते भेजो दो या गालियाँ उसे अब फर्क नहीं पड़ने वाला पर मरते वक्त तक वो तुम्हे ही याद करती रही ।

वो उस बात को याद करके हमेशा रोती रहती थी । उसकी जिदंगी की बस एक ही ख्वाहिश थी कि वो मरने से पहले बस एक बार तुम्हारे सामने घुटनों टेककर तुमसे माफ़ी मांग ले । मरते वक्त उसने यह वसीयत की है कि किसी भी तरह तुम्हे इस बात की इत्तला दूं कि वो तुम्हारी गुनहगार है और तुमसे माफ़ी चाहती है ।

तुम चाहे कितनी भी पत्थरदिल हो , अगर वो आँखों में आंसूलिए तुम्हारे सामने आती तो क्या तुम मुंह फेर लेते ? क्या इस वक्त भी वो तुम्हे माफ़ी की भीख मांगती अपने सामने खड़ी नहीं दिख रही ? चलकर उसका मुस्कराता हुआ चेहरा देखो । मोशियो आइवन , तुम्हारा दिल अब भी उसे चूमने के लिए बेकरार हो जाएगा । यकीन मानो मुझे ज़रा भी जलन नही होगी । देखो उसे , वो फूलों की सेज पर लेटी हुई ऐसी लग रही है , जैसे फूलों की रानी हो । जिंदगी में उसकी एक ही ख्वाहिश थी जो अधूरी रह गई।

आइवन , और वो है तुम्हारी माफ़ी । प्यार करने वाला बड़े दिल का होता है आइवन , वो माफ़ करना जानता है । चाहे कितनी भी नफरत हो या घमंड सब इसमें मिलकर विशाल और पवित्र हो जाते हैं । जिसे कभी तुमने प्यार किया था , उसकी आखिरी ख्वाहिश की तुम ठुकरा नहीं कर सकते । ‘ उसने आइवन का हाथ पकड़ा और हजारो सवालियां नजरो के सामने उसे लेकर जनाज़े के पास आया और ताबूत का ऊपरी तख्ता हटाकर हेलेन का शान्त , मासूम चेहरा उसे दिखा दिया ।

उस निस्पन्द , निश्चेष्ट , निर्विकार मूर्ती को मौत ने एक रूहानी नूर से नवाज़ दिया था मानो जन्नत के फ़रिश्ते उसका स्वागत कर रहे हो । आइवन की बेरहम आँखों में एक दिव्य ज्योति – सी चमक उठी और उसके जेहन में वो मंजर आया जब उसने हेलेन को प्यार से अपने आगोश में भरा था और उसे अपने दिल की रानी बनाया था । उसे लग रहा था ये सबकुछ जो उसके सामने है , एक सपना है । एकाएक उसकी आँखें खुल गयी हैं और वह उसी तरह हेलेन को अपने सीने से लगाये हुए है ।

उन प्यार के चद लम्हों के लिए क्या वह फिर से चौदह साल की जेल झेलने को तैयार नहीं हो जायगा ? क्या अब भी उसकी जिंदगी के सबसे हसीन पल वो नहीं थे जो उसने हेलेन के साथ गुज़ारे थे और क्या उन लम्हों के जादू को वो इन चौदह सालों में भूल भी पाया था ? उसने ताबूत के पास बैठकर काँपते हुई आवाज़ में बड़ी शिद्दत से खुदा से दुआ की ” ए खुदा ! तू मेरी जान से भी प्यारी हेलेन को माफ़ कर देना !

और जब वह ताबूत को कन्धा देते हुए चला तो उसकी रूह बेहद शर्मिंदा थी । वो कितना छोटा हो गया था , कितना नीच ! ताबूत कब्र में रख दिया गया था पर वो अब भी वहाँ बैठकर रो रहा था । ना जाने कब तक वो रोता रहा , दूसरे दिन रोमनाफ जब फातिहा पढ़ने कब्र पर आया तो देखा , आइवन सिजदे में सिर झुकाये हुए है और उसकी रूह को जन्नत नसीब हो चुकी थी । सीख : इस कहानी के दो पहलू है , एक यह कि जब हम किसी से सच्चे दिल से प्यार करते है , उस से धोखा मिलने पर वही प्यार नफरत और बदले की भावना का रूप ले लेता है।

धोखा देने वाला हमेशा ग्लानी की आग में जलता रहता है और ख़ुद की नज़रों में गिर जाता है . और दूसरा ये कि किसी के माफ़ी मांगने पर माफ़ करने वाला ज़्यादा बड़ा होता है . जब वह बड़ा दिल करके माफ़ करता है,तब उसके मन में कोई नफरत , जलन नहीं रहती और उसे सुकून का अनुभव होता है।

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