सुंदर पिचाई की जीवनी | Sundar Pichai Biography In Hindi

SUNDAR PICHAi BIOGRAPHY IN Hindi :-

ख़ुद को Google के CEO के रूप में इमेजिन कीजिए, क्या कमाल की फीलिंग है ना! आज जो Google के CEO हैं वह शख्स एक मामूली बैकग्राउंड से आए थे मगर फिर भी उन्होंने टॉप पर  अपनी जगह बनाई!
सुंदर पिचाई, एक Indian business executive, जो बचपन में काफी शांत रहते थे, जो अपनी पढ़ाई पर ध्यान देते और बहुत कम दोस्त बनाते थे. लेकिन इस नौजवान को अपने गोल्स और एम्बिशन को हासिल करने से कोई नहीं रोक सका.

सुंदर पिचाई की जीवनी | Sundar Pichai Biography In Hindi
Sundar Pichai

इस समरी में आप सुंदर पिचाई और उनकी गरीबी से लेकर अमीरी तक के सफ़र के बारे में जानेंगे. इसमें आप टेक्नोलॉजी के बारे में भी जानेंगे  कि कैसे उन्होंने Chrome और Android को उस मुकाम तक पहुंचाया जहां वो आज हैं!
तो आइए, लैरी पेज के सबसे ख़ास राइट हैंड शख्स और उनके टॉप तक पहुंचने के सफर के बारे में सुनते हैं!

सुंदर पिचाई की शुरुवाती ज़िंदगी और पढ़ाई 

सुंदर पिचाई जिनका  पूरा नाम- सुंदरराजन पिचाई है , का जन्म तमिलनाडु के मदुरै में 10 जून 1972 को हुआ था. उन्होंने चेन्नई के एक स्कूल में अपनी पढ़ाई शुरू की. वे  अशोक नगर इलाके में रहते थे. पिचाई हमेशा अपनी क्लास में टॉप करते  थे. बचपन से ही वे पढ़ाई में बेस्ट थे. सुंदर पिचाई के पिता, आर. एस पिचाई, एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के तौर पर इंग्लिश इलेक्ट्रिक कंपनी ऑफ़ इंडिया में काम करते थे.

आर एस पिचाई और उनकी पत्नी लक्ष्मी पिचाई अब अमेरिका में रहते हैं. लक्ष्मी पिचाई एक स्टेनोग्राफर थीं. उनका काम लेक्चर और स्पीच को शॉर्टहैंड में टाइप करना था. बाद में, सुंदर पिचाई के पिता ने इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट की मैन्युफैक्चरिंग प्लांट शुरू की. आर एस पिचाई के प्रोफेशन ने शायद सुंदर को इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए इंस्पायर किया था. 
सुंदर पिचाई की नानी, रंगानायकी का मानना था कि उनका पोता हमेशा काम को खेल से ज़्यादा ज़रूरी मानता था. सुंदर पिचाई को क्रिकेट का शौक था लेकिन उन्होंने कभी भी खेल को अपनी पढ़ाई के बीच में आने नहीं दिया.

बचपन में सुंदर पिचाई को उनकी फैमिली राजेश नाम से पुकारती थी. उन्हें साइंस और मैथ्स का सब्जेक्ट बहुत पसंद था. उनके कुछ ही दोस्त थे और वह हमेशा अपने काम पर ज्यादा ध्यान देते थे. 
सुंदर पिचाई के प्रिंसिपल को उनका स्कूल में बिताया हुआ  वक्त याद नहीं है , लेकिन आजकल उनकी  कामयाबी और अचिवेमेंट्स के बारे में जरूर जानते हैं.
प्रोफेसरों के मुताबिक, शंकर नाम का एक स्टूडेंट पिचाई के साथ पढ़ाई में मुकाबला करता था.

शंकर अब IIT मद्रास में प्रोफेसर हैं.
जवाहर नवोदय विद्यालय से मैट्रिक का एग्जाम पास करने के बाद, सुंदर पिचाई एक ऐसे स्कूल में पढ़ने गए जो IIT मद्रास के कैंपस के अंदर था. इसका नाम Vana Vaani स्कूल था. वहाँ  के स्टाफ को सुंदर के  बारे में कुछ ख़ास याद नहीं है क्योकिं स्कूल छोड़े हुए सुंदर को 25 साल हो चुके हैं. उन्हें पढ़ाने वाले सभी टीचर्स रिटायर हो चुके हैं. 
12th का एग्जाम खत्म करने के बाद, सुंदर पिचाई ने JEE के एग्जाम को पास किया और IIT खरगपुर में सीट हासिल की. उन्होंने कॉलेज में मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी करने के बाद, सुंदर पिचाई आगे की पढ़ाई के लिए अब्रॉड चले गए.

वे Masters in science in materials science and engineering के लिए स्टैनफोर्ड गए. यहां उन्हें  सीबेल स्कॉलर का ख़िताब दिया गया. सुंदर पिचाई ने पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी के Wharton स्कूल में एमबीए किया. Wharton में, सुंदर पिचाई को पामर स्कॉलर का नॉमिनेशन मिला. 
सुंदर पिचाई की  फैमिली का मानना है कि वह एक प्यारे इंसान हैं जो अपने  फैमिली मेंबर्स को इज़्ज़त देते हैं. उन्हें अपनी फैमिली से और शहर के लोगों से भी बहुत प्यार मिलता हैं, और सब उनकी तारीफ़ करते हैं.

सुंदर पिचाई का करियर

 अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, सुंदर पिचाई ने मैकिन्से एंड कंपनी में काम करना शुरू किया. मैकिन्से एंड कंपनी एक अमेरिकी मैनेजमेंट कंसलटेंट फर्म हैं. इन फैक्ट, यह सबसे बड़ी और सबसे पुरानी कंसलटेंट फर्म में से एक हैं. पिचाई ने इस कंपनी में इंजीनियर के तौर पर काम किया और एप्लाइड मैटेरियल्स के साथ-साथ मैनेजमेंट कंसल्टिंग में प्रोडक्ट मैनेजर का भी काम संभाला.

मैकिन्से एंड कंपनी में काम करने के बाद पिचाई ने एक और बड़ी कंपनी में काम करना शुरू किया. 2004 में सुंदर पिचाई ने Google ज्वाइन किया. वह Google के सॉफ़्टवेयर प्रोडक्ट के लिए प्रोडक्ट मैनेजमेंट और इनोवेशन एफर्ट के इंचार्ज थे.

इन प्रोडक्ट्स में Google क्रोम वेब ब्राउज़र और क्रोम OS शामिल हैं. क्रोम OS एक ऑपरेटिंग सिस्टम हैं. इसके अलावा इसमें गूगल का क्लाउड स्टोरेज-गूगल ड्राइव, भी शामिल हैं.
सुंदर पिचाई को Google के कुछ दूसरे एप्लिकेशन के डेवलपमेंट को चेक करने के लिए भी भेजा गया. इनमें जीमेल और गूगल मैप्स शामिल हैं.
2009 में, पिचाई को क्रोम OS पर एक डेमो देना था. इसके फौरन बाद, क्रोमबुक रिलीज़ हुआ. क्रोमबुक एक ऐसा डिवाइस हैं जो क्रोम OS पर चलता है. यह क्रोमबुक आगे जाकर 2012 में रिलीज़ किया गया था.
2010 में, सुंदर पिचाई ने WebM भी इंट्रोड्यूस किया. यह Google की स्पांसर की हुई एक मीडिया ऑडियो फॉर्मेट हैं.
 
इन सभी Google प्रोडक्ट्स को संभालने के बाद, सुंदर पिचाई ने Android को मैनेज किया. यह Android फोन में इस्तेमाल होने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम हैं जिसे पहले एंडी रुबिन मैनेज करते थे.
2015 में, सुंदर पिचाई को Google का अगला सीईओ चुना गया. इस पोजीशन से पहले, उन दिनों के सीईओ लैरी पेज ने सुंदर को प्रोडक्ट चीफ बनाया था. 
सुंदर का Google फैमिली की एक नई कंपनी Alphabet Inc. में भी हाथ रहा.

सुंदर को माइक्रोसॉफ्ट में सीईओ बनने का भी ऑफर दिया गया था . बाद में यह पोजीशन सत्या नडेला को दिया गया.
2017 में, सुंदर पिचाई ने काफी पब्लिसिटी हासिल की. उन्होंने दस पन्नों का मैनिफेस्टो लिखने वाले एक एम्पलॉई को नौकरी से निकाल दिया.

इस मेनिफेस्टो में औरतों को टेक्निकल रोल के लिए एनकरेज करने की कम्पनी की पॉलिसी को क्रिटिसाइज़ किया गया था. एम्पलॉई का मानना था कि बायोलॉजिकल वजहों से आदमी ही औरत से ज़्यादा टेक्निकल कामों में बेहतर होते हैं. पिचाई को लगा कि यह मैनिफेस्टो नाराज़ करने वाला और औरत और मर्दों के बीच फर्क पैदा करने वाला था.

2017 में, सुंदर पिचाई चाइना में वर्ल्ड इंटरनेट कांफ्रेंस में स्पीकर बने. उन्होंने बताया कि कैसे छोटी-छोटी चाइनीस कंपनियों को अपने प्रोडक्ट को चाइना से बाहर ले जाने में Google प्रोडक्ट्स की मदद से फायदा पहुंचा था.
जल्द ही दिसंबर 2019 में, सुंदर पिचाई Alphabet Inc. के सीईओ बन गए.

सुंदर पिचाई ने सिंगापुर फिनटेक फेस्टिवल में एक और स्पीच दी. स्पीच कोरोना वायरस की वजह से वर्चुअली ऑनलाइन दी गई थी. उन्होंने डिजिटल इकॉनमी के बारे में बात की. उन्होंने कोरोना महामारी  की वजह से इंटरनेट के बढ़ते चलन और इसके इम्पोर्टेंस पर ज़ोर दिया. उन्होंने यह भी कहा कि काफी देश अभी भी अपने सभी लोगों तक इंटरनेट कनेक्शन पहुंचा नहीं पाए हैं. पिचाई ने कहा कि उनका गोल इंटरनेट को सभी के लिए अवेलेबल  करवाना हैं.

सुंदर पिचाई का टेक्नोलॉजी से प्यार

जब सुंदर यंग थे, उन्हें अपनी मां की ब्लड टेस्ट रिपोर्ट लेने के लिए अक्सर हॉस्पिटल जाना पड़ता था. उन्हें वहाँ पहुंचने में बस से एक घंटा बीस मिनट लगता था. हॉस्पिटल पहुंचने के बाद, वह एक और घंटा लाइन  में इंतजार करते थे.

पिचाई ने पहली बार 12 साल की उम्र में टेलीफोन देखा था, जब उनके माता पिता  ने एक रोटेटरी टेलीफोन खरीदा था. इसे खरीदने के बाद सुंदर इस फोन से हॉस्पिटल कॉल कर पाते थे. इस पुराने किस्म के फ़ोन से कॉल करने में अब भी कम से कम 10 मिनट लगते थे. जब भी वह फोन करते, उन्हें अक्सर एक जैसा ही जवाब मिलता था कि रिपोर्ट अभी तैयार नहीं हैं.

पिचाई को वो दिन भी याद हैं जब उनकी फैमिली ने एक फ्रिज  खरीदा था. उसे खरीदने के बाद उनकी माँ को अब रोज़ खाना बनाने की ज़रूरत नहीं पड़ती थी क्योंकि वह बचे हुए खाने को फ्रिज में रख सकती थी और अपने फैमिली के साथ ज़्यादा वक्त बिता सकती थी.
बड़े होने के दौरान, पिचाई को ऐसे बहुत से एक्सपीरियंस हुए जिससे उन्हें टेक्नोलॉजी से प्यार हो गया कि किस तरह टेक्नोलॉजी ने उनकी ज़िंदगी को आसान बना दिया था. 
पिचाई ने अपनी कंपनी में एक बड़े बदलाव की घोषणा की. अब इन्होंने “मोबाइल-फर्स्ट” से “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” की तरफ मुड़ने का फैसला किया. अब, यह आवाज पहचानने वाले प्रोडक्ट, जो हमारी आवाज़ को सुनकर हमारी रिक्वेस्ट को पूरा करता हैं, वैसे प्रोडक्ट बंनाने की कोशिश में लग गए. आप इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को यूज़ करके गाने को बदल सकते हैं और अपने कमरे की लाइट भी बंद कर सकते हैं.

दूसरी तरफ, Google लेंस को  यूज कर एक कंप्यूटर, टेक्स्ट को ठीक वैसे ही देखता है जैसे एक इंसान देखता हैं. अगर आप अपने कैमरे को किसी रेस्ट्रॉ की तरफ मोड़ते हैं, तो यह आपको उस रेस्ट्रॉ की रिव्यु देगा. पिचाई का टारगेट हैं टेक्नोलॉजी को और ज़्यादा फैलाया जाए जिससे इसे हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल किया जा सके.
पिचाई अपनी कंपनी को ग्लोबल बनाने का इरादा रखते हैं. वह नहीं चाहते कि उनके प्रोडक्ट और सर्विस बस कुछ जगहों तक सीमित  रहें. वह चाहते हैं कि पूरी दुनिया जाने कि टेक्नोलॉजी कितनी अच्छी और आसान  हैं. वह चाहते हैं कि मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रॉइड को इतना सस्ता बनाया जाए कि यह 30 डॉलर के मोबाइल फोन का OS बन सके.

पिचाई की कामयाबी की शुरुआत क्रोम से हुई. उस वक्त, इंटरनेट एक्सप्लोरर हर कंप्यूटर पर इस्तेमाल होने वाला पावरफुल ब्राउज़र था. यहां तक कि जब पिचाई ने फाउंडर लैरी और Sergey को ब्राउज़र दिखाया, तब उनका रिएक्शन पूरी तरह पॉजिटिव नहीं था. लेकिन पिचाई ने पक्का किया कि क्रोम रिलीज़ हो जाए, और यह जल्द ही मार्केट में पॉपुलर हो गया.

इसने इंटरनेट एक्सप्लोरर की जगह ले ली, जो अब 2021 में सिर्फ  0.62% से कम डिवाइस पर काम कर रहा हैं. 
पिचाई की एक और कामयाबी की कहानी Android की पॉपुलैरिटी हैं. एंड्रॉइड के सीईओ को बदलकर सुंदर पिचाई को रखने के बाद, इसमें तेजी आने लगी थी.

सुंदर पिचाई की मिडल क्लास लाइफ

सुंदर पिचाई एक साधारण बैकग्राउंड से आए. जब उन्हें अमेरिका में पढ़ने के लिए स्कॉलरशिप मिली तो उनके पिता ने एक साल की अपनी सैलरी उनके फ्लाइट की टिकट पर खर्च कर दी. यह पहला मौका था जब पिचाई ने फ्लाइट में सफर किया था. उन्हें वह एक्सपीरियंस अच्छी तरह से याद हैं. उन दिनों घर में फोन कॉल करना काफी महंगा होता  था.

एक मिनट की बात करने के लिए उन्हें 2 डॉलर से ज़्यादा खर्चने पड़ते थे. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका में सिर्फ एक बैग पैक की कीमत उनके  पिता की एक महीने की सैलरी के बराबर थी. वह इन महंगे बैग पैक के बजाय पुराने इस्तेमाल किए हुए बैग पैक ख़रीदा करते थे. 
शुरुवात में, उनका घर बड़ा नहीं था. वह अपने किराएदारों के साथ रहते थे. सुंदर अपने छोटे भाई के साथ अपने घर के लिविंग रूम की ज़मीन  पर सोते थे. 
पिचाई अपनी जड़ों से जुड़े रहे और अपने बेटे को बचपन में फोन नहीं रखने दिया.

लेकिन उनका बेटा क्रिप्टोकरेंसी और एथेरियम में ज़रूर इन्वेस्ट करता हैं. पिचाई का कहना है कि वह यह देखकर  हैरान होते हैं कि टेक्नोलॉजी किस तरह से काम करती हैं. उन्होंने अपने बेटे को फोन यूज़ करने की इज़ाज़त नहीं दी लेकिन क्रिप्टोकरेंसी में इन्वेस्ट कर पैसा कमाने की इज़ाज़त दे दी थी . वह टीवी देखने को लेकर भी अपने बच्चों को डिसिप्लिन में रखते हैं. 

कॉलेज में भी पिचाई के पास कुछ खास नहीं था. वह बिना टीवी वाले बहुत छोटे से फ्लैट में रहते थे. उनके पास  गाड़ी  भी नहीं थी. उनके पास महँगी चीज़ें नहीं थी, इसलिए वह अपनी लाइफ में छोटी-छोटी चीजों को इम्पोर्टेंस देते थे. हर मिडल क्लास शख्स की तरह, वह बस में सफर करते. उनके पिता के पास नीले रंग का स्कूटर था और यही उनकी फैमिली के लिए सफर करने का इकलौता ज़रिया था.

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उनके पिता ने सुंदर और उनके भाई को अच्छी और आसान लाइफ देने के लिए, इस स्कूटर को खरीदा था. इसे खरीदने के लिए उन्होंने तीन सालों तक सेविंग की थी. पिचाई , उनके माता पिता  और उनके छोटे भाई उस छोटे स्कूटर पर बैठते  थे. 

पैसों की तंगी  के बावजूद, पिचाई के माता पिता  ने हमेशा अपने बच्चों की पढ़ाई पर पैसा ठीक से  खर्च किया. वे अपनी सारी सेविंग अपने बच्चों के लिए खर्च करते थे ताकि उन्हें हर मौका मिल सके. 

अपनी गर्ल फ्रेंड अंजली को डेट करने के दौरान, सुंदर के पास फोन नहीं था, स्मार्टफोन तो दूर की बात थी. वह एक लड़की को गर्ल्स हॉस्टल भेज देते थे और उससे अंजली को बुलवाया करते थे . वो लड़की हॉस्टल जाती थी और जोर-जोर से चिल्लाती थी कि सुंदर अंजली से मिलने आया है. यह उनके लिए बड़ा embarrassing होता  था, लेकिन उसके पास और कोई रास्ता था नहीं. सुंदर के अमेरिका जाने के बाद भी, वह अंजली से छह महीने तक बात नहीं कर सके थे. इसकी वजह उनकी फाइनेंसियल  कंडीशन थी.

एक वो दौर था जब उनके पास फ़ोन करने के लिए भी पैसे नहीं थे और आज वो वक़्त है जब लोग उनकी अर्निंग और नेट वर्थ के बारे में गुगल पर सर्च करते  हैं. भले ही आज वह करोड़पति हैं, लेकिन वह सीधी सादी लाइफ जीना पसंद करते हैं.

सुंदर पिचाई की क्रिटिसिज़्म और बैकलैश 

2018 दिसंबर में, यूनाइटेड स्टेट्स हाउस ज्यूडिशियरी कमिटी ने कई मामलों में Google से पूछताछ की. कमिटी का मानना था कि Google ने अपने प्लेटफार्म को पॉलिटिक्स के लिए गलत यूज़ किया था और अपने यूज़र्स के कॉन्फिडेंशियल और सेंसिटिव डेटा चुरा लिए थे.

Google पर चाइना में सेंसर किया गया सर्च ऐप का प्लान बनाने का भी दोष लगा. सुंदर पिचाई ने इन सबसे इंकार किया और कहा कि गूगल और उनके एम्प्लॉई किसी भी तरह के सर्च रिजल्ट पर कोई असर नहीं डाल कर सकते हैं और, Google का कोई  पॉलिटिकल इंटरेस्ट नहीं था, इसलिए उनके यूज़र्स को किसी भी पॉलिटिकल एजेंडे के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया.

पिचाई ने यह भी कहा कि यूज़र्स आसानी से अपने डेटा को Google को निकालने से मना कर सकते हैं. उन्होंने चाइनीस सेंसर ऐप के दावों को भी खारिज किया. 
अक्टूबर 2020 में, कॉमर्स, साइंस और ट्रांसपोर्टेशन पर अमेरिका के सीनेट कमिटी ने पिचाई को subpoena के लिए समन किया. पिचाई, फेसबुक के सीईओ मार्क ज़करबर्ग, ट्विटर के सीईओ जैक डोरसी, इन तीनों को 1934 के Communications Decency Act की सेक्शन 230 से छूट से जुड़े मामलों के लिए बुलाया गया था.

आरोप था कि यह कानून इन कंपनियों को सेंसरशिप से बचाता हैं. फेसबुक ने इस मामले पर कोई कमेंट नहीं किया. जबकि ट्विटर और गूगल ने कुछ वक्त बाद जवाब दिया.

एक Artificial Intelligence Researcher, टिमनिट गेब्रु को एक एकेडेमिक पेपर की वजह से Google से निकाल दिया गया था. वह यह साबित करने के लिए जानी जाती थीं कि कैसे face determination algorithm काले या सांवले रंग के चेहरों की तुलना  में गोरे चेहरों पर बेहतर काम करते हैं. टिमनिट एक पेपर की को-ऑथर भी थी जिसमें टेक्नोलॉजी में  ethical issues के मुद्दों को शामिल किया गया. टिमनिट को अपने रिसर्च पेपर से एम्पलॉईस के नाम हटाने के लिए कहा गया था. उसने यह बात ठुकरा दी, जिसके लिए उसे निकाल दिया गया.

यह घटना सोशल मीडिया पर पॉपुलर हो गई जहां पुराने एम्पलॉईस ने कहा कि उन्हें असल में कंपनी में रंग-भेद के खिलाफ बोलने के लिए निकाल दिया गया था.
सुंदर पिचाई ने घटना पर कमेंट किया और कहा कि उन्हें इस बात का दुख हैं. उन्होंने अपने फील्ड में अच्छा काम कर रही एक ब्लैक औरत के जाने के लिए एम्पलॉईस से माफी मांगी. उन्होंने घटना की पूरी जिम्मेदारी भी ली.

जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या की घटना के खिलाफ खड़े हुए पिचाई को भारतीयों ने इंटरनेट पर लताड़ा. भारतीयों ने कहा कि सुंदर ने अमेरिका में भेदभाव के खिलाफ बात की लेकिन भारतीयों के लिए ऐसा नहीं  किया. ट्वीट करने के अलावा गूगल की मेमोरी में, यूट्यूब और अल्फाबेट होमपेज पर भी मैसेज लिखा गया था. ट्विटर यूज़र्स ने खासकर भारत में एक दलित की हत्या के बारे में पिचाई के चुप्पी साधने पर उनकी खिंचाई की और उन पर दोगलेपन  का आरोप लगाया.

निष्कर्ष:-

तो इस समरी ने आपको पिचाई की ज़िंदगी के कई अलग-अलग पहलुओं से रूबरू करवाया. 
आपने उनकी साधारण शुरुआत और भारत में उनकी ज़िंदगी के बारे में पढ़ा. आपने उनकी फैमिली और टेक्नोलॉजी से उनके प्यार के बारे जाना.
साथ ही, आपने उनकी पर्सनल लाइफ और उनकी शादी के बारे में भी पढ़ा.
इस समरी ने आपको डिटेल में  समझाया कि कैसे सुंदर अमेरिका गए और दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक के सीईओ बने.
आपने उनके संघर्ष, पैसों की तंगी और टॉप पर पहुँचने तक की इंस्पिरेशन के बारे में भी जाना. 
 
 

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